राजस्थान में स्टांप पर बिक रहीं लड़कियों का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। एक मीडिया संस्थान के स्टांप पेपर पर बिक रही लड़कियों के खुलासे के बाद महिला आयोग व अन्य जांच एजेंसियां सक्रिय हो गईं हैं। इस तरह के मामलों में प्रताड़ित महिलाएं भी पुलिस थाने पहुंचकर रिपोर्ट दर्ज करा रही हैं।
इसी मुद्दे पर सवाल करने पर राजस्थान सरकार में खेल मंत्री अशोक चांदना ने एक विवादित बयान दे डाला। जिले में मीडिया से बात करते हुए चांदना ने कहा कि किस दुनिया में जीते हो, 10 हजार रुपये में तो जूता भी नहीं मिलता, लड़की कहां से मिलेगी?
लड़कियों की खदीद-फरोख्त को लेकर चांदना ने कहा कि इस तरह को कोई मामला सामने नहीं आया है। अगर, आएगा तो कार्रवाई की जाएगी।
बता दें कि चार नवंबर को भीलवाड़ा जिले की दो महिलाएं कलेक्टर आशीष मोदी के पास पहुंची थी। एक महिला ने अपनी शिकायत के कहा था कि उसके ससुर और पति ने कर्ज चुकाने के लिए दो ननदों को दलालों को बेच दिया। ये दलाल लड़कियों से देह व्यापार कराने का काम करते हैं। पीड़िता ने बताया कि उसकी 7 और 8 साल की दो ननदों का 3.5 लाख रुपये में सौदा हुआ था। इसी तहर कलेक्टर के पास पहुंची दूसरी महिला ने कहा कि उसके पति ने आठ साल की बेटी को दस साल पहले दलालों को बेच दिया। उसके बाद से वह कभी अपनी बेटी से नहीं मिल पाई हैं।
महिलाओं ने कलेक्टर आशीष मोदी को चार दलालों के नाम भी दिए थे। जिसके बाद कलेक्टर के आदेश पर मांडलगढ़ थाना पुलिस ने बच्चियों को खरीदने वाले दलाल मुकेश और उसकी पत्नी गायत्री, सरिना पत्नी गोपाल और कमला पत्नी रूपा के खिलाफ केस दर्ज कर लिया था।
राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष ने भी उठाए थे सवाल
बीते दिनों राजस्थान दौरे पर आईं राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष रेखा शर्मा ने भी इस मामले को लेकर गंभीर बातें कहीं थी। उन्होंने कहा था कि राजस्थान में बच्चियों से सेक्स वर्कर का काम कराया जा रहा है। यहां एक बहुत बड़ा रैकेट काम कर रहा है। केंद्र सरकार इसकी जांच के लिए जांच के लिए कोई कमेटी या एसआईटी बनाए। जिससे पता चल सके कि यह बच्चियां कौन-कौन से प्रदेश से यहां लाईं जा रही है और कहां भेजी जा रही हैं।