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'किडनी ट्रांसप्लांट कराओ या जहर दे दो': 70 दिन से अस्पताल में भर्ती पांच प्रस्तुाओं ने मांगा इंसाफ, मामला क्या

Mon, 13 Jul 2026 10:15 PM IST
कोटा ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोटा

सार

कोटा मेडिकल कॉलेज में 70 दिनों से भर्ती किडनी फेलियर से पीड़ित पांच प्रसूताओं के परिजनों ने जिला कलेक्टर को ज्ञापन देकर किडनी ट्रांसप्लांट की मांग की। 48 घंटे में फैसला नहीं होने पर डायलिसिस बंद करने की चेतावनी दी है।
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जिला कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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राजस्थान के कोटा मेडिकल कॉलेज अस्पताल में करीब 70 दिनों से भर्ती प्रसूताओं के परिजनों ने सोमवार को राज्य सरकार से न्याय की गुहार लगाई। इस संबंध में पीड़ित परिवारों ने जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर अस्पताल में भर्ती किडनी फेलियर से पीड़ित पांच महिलाओं का जल्द किडनी ट्रांसप्लांट कराने की मांग की। परिजनों ने कहा कि यदि सरकार यह नहीं करा सकती तो उन्हें "जहर दे दे"। ज्ञापन पर अस्पताल में भर्ती महिलाओं के हस्ताक्षर भी हैं। परिवारों का आरोप है कि अस्पताल की लापरवाही और कथित नकली दवाओं के कारण महिलाओं की दोनों किडनी खराब हो गईं।

परिजनों के अनुसार मई में प्रसूताओं को अस्पताल में भर्ती कराया गया था। सिजेरियन डिलीवरी के बाद पांच महिलाओं की मौत हो गई, जबकि पांच अन्य महिलाओं की हालत अब भी गंभीर बनी हुई है। उनका आरोप है कि इन महिलाओं की किडनी फेल हो चुकी है और अब हर दूसरे दिन डायलिसिस करना पड़ रहा है। लगातार डायलिसिस से उन्हें शारीरिक और मानसिक पीड़ा झेलनी पड़ रही है। अस्पताल में रागिनी मीणा, आरती चोपदार, पिंकी, सुशीला और धन्नी सुमन भर्ती हैं।

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धन्नी बाई के परिजनों का कहना है कि वह अब डायलिसिस के नाम से ही डर जाती हैं और कई बार इलाज कराने से मना कर चुकी हैं। परिजनों के मुताबिक उन्होंने यहां तक कह दिया कि यदि डायलिसिस ही कराना है तो उसकी बजाय उन्हें जहर का इंजेक्शन दे दिया जाए। परिवारों ने सरकार से सभी महिलाओं का किडनी ट्रांसप्लांट कराने की मांग की है। ये सभी महिलाएं 4 से 8 मई के बीच अस्पताल में भर्ती हुई थीं और पिछले करीब 70 दिनों से डायलिसिस के सहारे जीवन जी रही हैं।

प्रशासन को 48 घंटे की चेतावनी
परिजनों ने जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर प्रशासन को 48 घंटे का समय दिया है। उनका कहना है कि यदि इस अवधि में किडनी ट्रांसप्लांट को लेकर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया तो सभी महिला मरीज डायलिसिस कराना बंद कर देंगी। उनका कहना है कि बार-बार डायलिसिस का दर्द अब महिलाओं के लिए असहनीय हो चुका है और परिवार भी आर्थिक व मानसिक संकट से गुजर रहे हैं।

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