उत्तर प्रदेश में बदायूं जिले के सहसवान गांव निवासी अभिषेक सिंह (19) पिछले दो साल से कोटा के कुन्हाड़ी में दातार रेसीडेंसी हॉस्टल में रहकर मेडिकल एंट्रेस परीक्षा की तैयारी कर रहा था। मेडिकल कॉलेज एंट्रेस में सफल नहीं हो पाने के कारण डिप्रेशन में आकर फांसी के फंदे पर झूल गया। छात्र अभिषेक ने फांसी लगाने से पहले एक सुसाइड नोट भी छोड़ा है। सुसाइड नोट में लिखा है कि मैं घर वालों की उम्मीदों पर खरा नहीं उतर सका। इसलिए जान देने जा रहा हूं और मेरी मौत का जिम्मेदार में स्वयं हूं।
कुन्हाड़ी थाने के एएसआई दुर्गालाल ने बताया कि यूपी में बदायूं के सहसवान गांव का अभिषेक पुत्र आराम सिंह कुन्हाड़ी के दातार रेसीडेंसी में रह कर नीट की तैयारी कर रहा था, जिसने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। मौके से एक सुसाइड नोट भी मिला है, जिसमें छात्र ने घर वालों से माफी मांगी है कि आपकी उम्मीदों पर खरा नहीं उतर सका। मुझे माफ कर देना और लिखा कि मेरी मौत का जिम्मेदार मैं स्वयं हूं। छात्र के शव को एमबीएस मोर्चरी में रखवाया गया है और परिजनों को सूचना कर दी है। उनके आने के बाद ही शव का पोस्टमार्टम करवाया जाएगा।
मामले में हॉस्टल संचालक की गंभीर लापरवाही भी नजर आ रही है। बताया जा रहा है कि मृतक छात्र अभिषेक सिंह के गांव का ही एक लड़का वैभव भी इसी हॉस्टल में रहता है। उसने देखा कि अभिषेक ने बुधवार शाम को भी खाना नहीं खाया और गुरुवार को भी सुबह लंच नही किया। तब वैभव ने हॉस्टल संचालक सुमित सिंह को सूचना दी। सुमित ने कमरे की आकर देखा तो कमरे से दुर्गंध आ रही थी। कमरे का दरवाजा भी अंदर से लॉक था। इस पर सुमित ने पुलिस को सूचना दी और दरवाजा तोड़कर देखा तो अभिषेक फांसी पर झूलता हुआ नजर आया।
मामले में आशंका जताई जा रही है कि अभिषेक ने बुधवार को ही फांसी लगा ली थी। लेकिन किसी ने भी इस और ध्यान नहीं दिया की फलां छात्र नजर नहीं आ रहा। मतलब जिला प्रशासन और कोचिंग संस्थानों की सख्त हिदायत के बाद भी हॉस्टलों में प्रोपर मॉनिटरिंग और केयर टेकिंग नही हो रही है। इनका गैर जिम्मेदाराना रवैया बता रहा है कि छात्र इनके लिए बस एक कमाई का साधन मात्र है, इससे ज्यादा और कुछ नहीं।