दिल्ली के तुगलकाबाद में बढ़ई का काम करने वाले रंजीत शर्मा शुक्रवार को कोटा के एक अस्पताल की मोर्चरी के बाहर अपने बेटे के शव का इंतजार करते हुए फूट-फूटकर रो पड़े। उनका बेटा रोशन शर्मा (23) पिछले तीन वर्षों से कोटा में रहकर NEET-UG परीक्षा की तैयारी कर रहा था।
परिवार के अनुसार रोशन ने कुछ सप्ताह पहले अपने माता-पिता को सूचित किया था कि वह इस वर्ष 4 मई को होने वाली परीक्षा में नहीं बैठेगा और उसे तैयारी के लिए एक और वर्ष चाहिए। रंजीत शर्मा और उनकी पत्नी 22 अप्रैल को बेटे को घर वापस ले जाने के लिए कोटा पहुंचे थे लेकिन रोशन ने घर लौटने से इंकार कर दिया।
गुरुवार सुबह पुलिस को उसका शव कोटा में रेलवे ट्रैक के पास झाड़ियों में मिला। प्रारंभिक जांच से पता चला है कि उसने संभवतः कोई जहरीला पदार्थ खाया था। पुलिस ने BNS की धारा 194 (ए) के तहत मामला दर्ज कर लिया है।
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रोशन के पिता ने बताया कि उनका बेटा पढ़ाई में बहुत अच्छा था और कोचिंग संस्थान की नियमित परीक्षाओं में 550 से 600 अंकों के बीच स्कोर करता था। उन्होंने कहा कि उसने हाल ही में अपनी बहन से कहा था कि उसे पूरी तैयारी के लिए एक और साल चाहिए। पुलिस ने बताया कि परिजनों ने किसी के खिलाफ कोई आरोप नहीं लगाया है।
कोटा में यह इस वर्ष संदिग्ध आत्महत्या का यह 12वां मामला है। वर्ष 2023 में ऐसी 17 घटनाएं दर्ज की गई थीं। 22 अप्रैल को भी बिहार के एक 18 वर्षीय NEET छात्र ने छात्रावास के कमरे में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी। उसने एक सुसाइड नोट में लिखा था कि उसकी मौत के लिए न तो परिवार जिम्मेदार है, न ही उसकी परीक्षा की तैयारी।
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कोचिंग हब के रूप में पहचान रखने वाले कोटा में छात्रों की आत्महत्या की बढ़ती घटनाएं शिक्षा व्यवस्था और मानसिक स्वास्थ्य के प्रति गहरी चिंता का विषय बन गई हैं। विशेषज्ञ अक्सर इसके पीछे अत्यधिक पढ़ाई का दबाव और पारिवारिक अपेक्षाओं को कारण मानते हैं।