सर्वसमाज की ओर से महापड़ाव के आह्वान के बाद चार दिन तक धरना चला था, जिसके बाद मृतक के परिजनों और दलित समाज के नेताओं की मांग पर गिराब थानाधिकारी निम्ब सिंह के निलंबन और DYSP, SC-ST सेल के पुष्पेंद्र सिंह आढ़ा के खिलाफ कार्रवाई की अनुशंसा करने और मामले में अन्य निर्दोष लोगों के नाम शामिल करने के विरोध में भीड़ जमा हुई।
चार दिन के गतिरोध के बाद जिला प्रशासन ने 50 लाख की आर्थिक सहायता, मृतक के दो आश्रितों को संविदा पर नौकरी देने, गिराब थानाधिकारी को निलंबित कर डिप्टी एसी-एसटी सेल के खिलाफ कार्रवाई की अनुशंसा की थी, जिसके विरोध में सोमवार को सर्वसमाज ने दोनों पुलिस अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई को वापस लेने और हत्या में शामिल तीन आरोपियों को गिरफ्तार करने बाद 14 अन्य लोगों को मामले में झूठा फंसाने के विरोध में प्रदर्शन किया।
क्या है पूरा मामला?
12 अप्रैल को बाड़मेर के आसाडी गांव में कोजाराम मेघवाल के साथ जमीनी विवाद को लेकर उसके पड़ोसियों ने मारपीट कर दी थी। उसके बाद गंभीर घायल हुए कोजाराम मेघवाल को बाड़मेर के राजकीय अस्पताल लाया गया। यहां पर उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। घटना के बाद मृतक के परिजनों और दलित समाज के लोगों ने आरोपियों की गिरफ्तारी, पीड़ित परिवार को आर्थिक सहायता, दो आश्रितों को सरकारी नौकरी देने, मौत से पहले कोजाराम मेघवाल की ओर से आरोपी पक्ष पर मारपीट और SC-ST एक्ट में जो शिकायत पुलिस में दी गई, उसकी जांच कर रहे पुलिस अधिकारी, कर्मचारियों पर कार्रवाई की मांग को लेकर धरने दिया गया था।