केकड़ी जिले के एक छोटे से गांव प्रांहेड़ा में पाषाण को परमात्मा बनाने का तीन दिवसीय अनुष्ठान शुक्रवार को दोपहर धूमधाम से संपन्न हुआ। दिगंबर जैन समाज के हजारों लोगों की साक्षी में इस पंचकल्याणक महोत्सव के अंतर्गत शास्त्रोक्त विधि विधानपूर्वक मंत्रोच्चार के साथ सूर्यमंत्र देकर मूर्तियों में प्राण फूंके गए।
यह महोत्सव केकड़ी जिले के ग्राम प्रांहेड़ा में आयोजित हुआ। गांव में दिगम्बर जैन समाज के नवनिर्मित पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन मंदिर में प्रतिमाओं की प्राण प्रतिष्ठा के लिए यहां स्कूल ग्राउंड में आयोजित इस तीन दिवसीय महोत्सव में जैन मुनि अनुपमसागरजी और मुनि यतीन्द्रसागरजी महाराज के सानिध्य में आगरा के प्रतिष्ठाचार्य पंडित आशुतोष जैन शास्त्री और उनके सहयोगी अंकित जैन शास्त्री ने तीन दिन तक भगवान के गर्भ, जन्म, तप, ज्ञान व मोक्ष कल्याणक के विभिन्न अनुष्ठान व क्रियाएं पूर्ण की।
मोक्ष कल्याणक के अंतर्गत दोनों मुनि महाराजों द्वारा भगवान की छह मूर्तियों में सूर्यमन्त्र देकर इन मूर्तियों को साक्षात भगवान की तरह पूज्य बनाया गया और गाजे बाजों के साथ शोभायात्रा के रूप में गांव में बनाये गए नवनिर्मित जैन मंदिर में ले जाकर वेदी में विराजमान किया गया। बताया गया कि मंदिर में नई प्रतिष्ठित प्रतिमाओं सहित भगवान की कुल 21 प्रतिमाएं विराजमान हैं। मंदिर की सभी वेदियों पर सोने और चांदी के नए छत्र लगाए गए तथा मंदिर के शिखर पर नये कलश स्थापित किए गए।
इस अवसर पर मुनि अनुपमसागरजी महाराज ने कहा कि आज का मोक्ष कल्याणक ऐसी ही महान आत्माओं के पुरुषार्थ की याद दिलाता है, जिन्होंने गर्भ से लेकर केवलज्ञान तक की अपनी यात्रा तप, संयम और साधना के साथ पुरुषार्थ में वृद्धि करते हुए शाश्वत सुख प्राप्त कर पूर्ण की। ऐसे आदिप्रभु आदिनाथ भगवान जिन्होंने अपने पुरुषार्थ के द्वारा कर्म समूह को पूर्ण रूप से नष्ट किया और मोक्ष पद प्राप्त कर सिद्धालय में विराजमान हो गए। मोक्ष की महिमा का वर्णन करने वाला यह मोक्ष कल्याणक हम सबके कल्याण का हेतु बने और हम सब जीवों का कल्याण हो तथा इसी भाव के साथ अनंत कालीन भ्रमण पर विराम लगे और हम सभी अपने आतम राम का ध्यान कर उसमें ही रमण करें।
महोत्सव में केकड़ी सहित आस पास के हजारों लोग उमड़े, जिससे छोटे से गांव प्रांहेड़ा में विशाल मेला लग गया। गांव के लोग इस कदर लोगों की चहल पहल व वाहनों की रेलमपेल को देखकर दंग रह गए। सभी ने मुख्य आयोजन की धार्मिक क्रियाओं के दौरान श्रद्धा व भक्ति के साथ महोत्सव स्थल पर मौजूद रहकर पुण्य लाभ कमाया। महोत्सव के समापन पर केकड़ी पंचायत समिति के प्रधान होनहारसिंह राठोड़ मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए।
महोत्सव समिति के उपाध्यक्ष कैलाशचंद लुहाड़िया ने बताया कि महोत्सव के अंतर्गत कैलाशचंद कमलादेवी लुहाड़िया ने भगवान के माता पिता, नोरतमल मंजूदेवी बज ने सौधर्म इंद्र, राजेन्द्र कुमार शिमला देवी लुहाड़िया ने कुबेर इंद्र, कैलाशचंद मुन्नीदेवी पहाड़िया ने महा यज्ञनायक, गजेंद्र कुमार राजुलदेवी पहाड़िया ने यज्ञनायक, ओमप्रकाश दीपमाला गोधा ने ईशान इंद्र, शांतिलाल मंजूदेवी पहाड़िया ने सनत इंद्र, पारस कुमार निर्मलादेवी बज ने महेंद्र इंद्र, पुखराज कमलादेवी पांड्या ने ब्रह्मेन्द्र इंद्र, अभयकुमार अंजनादेवी ने ब्राह्मोत्तर व उत्तम प्रकाश गुड्डीदेवी ने लांतव इंद्र की भूमिका धारण कर पंचकल्याणक के धार्मिक अनुष्ठान संपन्न किए।
महोत्सव के प्रवक्ता पदम लुहाड़िया व पारस लुहाड़िया ने बताया कि महोत्सव का ध्वजारोहण महावीर प्रसाद, रमेशचंद, संतकुमार, टीकमचंद, मोनूकुमार, हर्षित, पुण्य एवं मित्तल परिवार ने किया। अशोककुमार, पुष्पादेवी, अमनकुमार, कविता, अतुल, लवीन, मान्या व बड़जात्या परिवार ने मंडप का उद्घाटन किया। प्रेमदेवी, कैलाशचंद, प्रकाशचंद, सुशीलकुमार, संदीप, अक्षय, आदित्य, सिद्धार्थ, श्रेयांश व पाटनी परिवार वेदी के पुण्यार्जक रहे, जबकि शांतिलाल, मंजूदेवी, सुरभि, मयंक, स्नेहा और पहाड़िया परिवार पूजन सामग्री के पुण्यार्जक रहे। कार्यक्रम में सानिध्य लुहाड़िया व शीतल कासलीवाल भरत व बाहुबली बने।