कुंभलगढ़ वन्यजीव अभ्यारण्य में लगी आग
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पाली से कुंभलगढ़ वन्यजीव अभ्यारण्य के जंगलों में भड़की भीषण आग अब एक विनाशकारी संकट का रूप ले चुकी है। सात दिनों का लंबा समय बीत जाने के बाद भी इस धधकती आग पर काबू पाना प्रशासन और वन विभाग के लिए एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। आग की लपटें थमने का नाम नहीं ले रही हैं और हवाओं के साथ धीरे-धीरे आगे बढ़ते हुए अब यह खतरनाक स्तर तक पहुंचकर मामाजी बावजी खाड़ी क्षेत्र की ओर रुख कर चुकी हैं।
50 हेक्टेयर से ज्यादा वन संपदा खाक
पिछले एक सप्ताह से लगातार जल रहे इस अभ्यारण्य में अब तक करीब 50 हेक्टेयर से अधिक की वन संपदा पूरी तरह जलकर राख हो चुकी है, जिससे पर्यावरण को अपूरणीय क्षति पहुंची है। जंगल की इस विभीषिका में न केवल बेशकीमती पेड़-पौधे और औषधीय वनस्पतियां नष्ट हो रही हैं, बल्कि यहां का पारिस्थितिकी तंत्र भी बुरी तरह डगमगा गया है।
वन्यजीवों पर संकट
कुंभलगढ़ अभ्यारण्य अपनी समृद्ध जैव विविधता के लिए जाना जाता है, जहां बड़ी संख्या में पैंथर, भालू, नीलगाय और अन्य दुर्लभ वन्यजीव विचरण करते हैं। आग के इस तांडव के कारण इन बेजुबान जानवरों के आशियाने उजड़ गए हैं और वे अपनी जान बचाने के लिए सुरक्षित स्थानों व रिहायशी इलाकों की ओर पलायन करने को मजबूर हैं।
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लापरवाही के आरोप
इस विकट परिस्थिति ने वन विभाग की कार्यप्रणाली और तैयारियों पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय स्तर पर विभाग की लापरवाही की चर्चाएं तेज हैं, क्योंकि आग को शुरुआती दौर में रोकने के पुख्ता इंतजाम नजर नहीं आए। हालांकि, भौगोलिक दृष्टि से देखा जाए तो कुंभलगढ़ का पूरा क्षेत्र ऊबड़-खाबड़ पहाड़ियों और दुर्गम रास्तों से घिरा हुआ है, जिसके कारण अग्निशमन दल और वनकर्मियों को मौके पर पहुंचने और आग बुझाने के संसाधनों का उपयोग करने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।