फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

12 लोगों को रौंदने की जांच क्यों नहीं हुई?: राजस्थान हाईकोर्ट पुलिस जांच पर नाराज, नागौर एसपी को किया तलब

Wed, 09 Sep 2026 09:33 PM IST
हिमांशु सिंह बघेल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जोधपुर

सार

राजस्थान हाईकोर्ट ने रियां बड़ी के बजरी विवाद से जुड़े मामले में पुलिस की जांच प्रक्रिया पर नाराजगी जताई है। कोर्ट ने 12 लोगों को कैंपर से रौंदने की घटना की अब तक जांच नहीं होने पर सवाल उठाते हुए नागौर पुलिस अधीक्षक को दोनों मामलों की पूरी जानकारी के साथ व्यक्तिगत रूप से तलब किया है। 
विज्ञापन
राजस्थान हाईकोर्ट - फोटो : Amar Ujala
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

राजस्थान हाईकोर्ट ने रियां बड़ी क्षेत्र में बजरी से जुड़े मामले में पुलिस की जांच प्रक्रिया पर कड़ी टिप्पणी की है। कोर्ट ने सुनवाई के दौरान 12 लोगों को कैंपर से रौंदने की कथित घटना की अब तक जांच नहीं होने पर नाराजगी जताई। साथ ही हाईकोर्ट ने नागौर पुलिस अधीक्षक को दोनों मामलों से जुड़ी पूरी जानकारी के साथ व्यक्तिगत रूप से अदालत में पेश होने का निर्देश दिया।
विज्ञापन


अदालत ने संबंधित थाना प्रभारी से मामले की जांच के तरीके पर जवाब मांगा था। थाना प्रभारी जांच में कथित दोहरे मापदंड और पक्षपातपूर्ण रवैये को लेकर कोर्ट को संतुष्ट नहीं कर पाए। इसके बाद हाईकोर्ट ने नागौर पुलिस अधीक्षक को तलब किया। मामले में याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता पंकज चौधरी ने पक्ष रखा। मामले की अगली सुनवाई 28 सितंबर 2026 को होगी।

ये भी पढ़ें-  राजस्थान: आईआईटी की छात्रा ने चुनी राजनीति की राह, कॉर्पोरेट छोड़ आप के टिकट पर मैदान में उतरीं गायत्री दुआ
विज्ञापन
विज्ञापन


ग्रामीणों की गिरफ्तारी और निष्पक्ष जांच की मांग
रियां बड़ी क्षेत्र में बजरी से जुड़े मुद्दे को लेकर ग्रामीणों ने विरोध प्रदर्शन किया था। इस दौरान 20 से ज्यादा ग्रामीणों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया। राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के मेड़ता विधानसभा बीएलए-1 सुरेंद्र बेड़ा ने पीड़ित परिवारों से मिलकर उन्हें हरसंभव मदद का भरोसा दिया है। उन्होंने जोर दिया कि ग्रामीणों ने बजरी से जुड़े मुद्दे पर अपनी आवाज उठाई थी, इसलिए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। यदि 12 लोगों को कैंपर से रौंदने की घटना हुई है, तो उसकी भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। केवल प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार करना सही नहीं है।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें