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खबरों के खिलाड़ी: पशोपेश में राजस्थान की जनता, मोदी बनाम गहलोत में किसका पलड़ा भारी? जानें विश्लेषकों की राय

Mon, 20 Nov 2023 09:00 PM IST
अर्पित याज्ञनिक न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जोधपुर

सार

Khabron Ke Khiladi: राजस्थान का चुनावी समर अपने शबाब पर पहुंच गया है। जीत के लिए भाजपा मोदी की गारंटी पर लड़ रही है तो कांग्रेस गहलोत सरकार की योजनाओं को लेकर आगे बढ़ रही है।
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जोधपुर में चुनावी चर्चा। - फोटो : Amar Ujala Digital
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विस्तार
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राजस्थान के चुनाव को चार दिन शेष हैं। प्रदेश की राजनीति को लेकर अमर उजाला के 'सत्ता का संग्राम' का चुनावी रथ मुख्यमंत्री के गृह नगर जोधपुर पहुंचा है। यहां हमारे बीच प्रदेश की राजनीति पर चर्चा के लिए वरिष्ठ पत्रकारों में अजय अस्थाना, संगीता शर्मा और मुकेश दत्त शर्मा शामिल हुए। वरिष्ठों से सवाल-जवाब के दौरान हमने ये जानने का प्रयास किया कि राजस्थान में इस बार क्या होने वाला है? 'जादूगर' का जादू एक बार फिर चलेगा या रोटी पलटने का पुराना रिवाज एक बार फिर देखने को मिलेगा।

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'जादूगर' का जादू राजस्थान से पहले जोधपुर में कितना?
चुनावी चर्चा में शामिल वरिष्ठ पत्रकार संगीता शर्मा ने इस सवाल के जवाब में कहा कि गहलोत जी का जादू उनकी सीट पर तो कायम है, मगर ओवरऑल देखा जाए तो इस बार माहौल पहले जैसा नहीं दिख रहा है। इस बार मतदाता मौन है। हर बार चुनाव से पहले मतदाता ही स्पष्ट कर देते हैं कि पलड़ा किसका भारी रहने वाला है। इस बार प्रत्याशियों को भी अपनी जीत का पूरा पक्का भरोसा नहीं है।

टिकट बंटवारे के बाद दोनों ही पार्टियों के बागियों की क्या रहेगी भूमिका?
संगीता शर्मा ने बताया कि भाजपा हो या कांग्रेस दोनों ही पार्टियों में हर बार टिकट बंटवारे के बाद डैमेज कंट्रोल की जो कवायद होती थी, वो इस बार नहीं देखी गई। आज की तारीख में दोनों ही पार्टियों के बागी 80 सीटों पर खड़े हैं। मेरा मानना है कि इनमें से करीब आधे बागी समीकरण बिगाड़ सकते हैं। ये तय है कि दोनों पार्टियों में बागवती मुश्किलें बढ़ाने वाले हैं। इसके अलावा अभी तक बीजेपी पूरी तरह से कमल को आगे लेकर चलती रही है। पार्टी के जो बड़े नेता थे, उनको भी हाशिए पर रखा हुआ था अब तक। अब संकल्प पत्र में वसुंधरा राजे जैसे बड़े चेहरे देखने को मिले हैं। यही हाल कांग्रेस का भी है। इस बार कांग्रेस का मतलब गहलोत का चेहरा ही देखा जा रहा है।
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जनता इस बार न सत्ता न विपक्ष, किसी को लेकर मुखर नहीं है, क्यों? 
सवाल पर टिप्पणी करते हुए वरिष्ठ पत्रकार अजय अस्थाना ने बताया कि जनता इस बार पशोपेश में है। ऐसा इसलिए क्योंकि जनता के पास इस बार गहलोत सरकार की योजनाएं और सात गारंटियां हैं, तो दूसरी तरफ मोदी जी की खुद की गारंटी है। अभी मोदी जी बायतु आए। इसके अलावा और जहां-जहां भी भाजपा की सभा हुई हैं, सब में मोदी जी ने कमल पर ही वोट की अपील की है। कहीं भी एक भी प्रत्याशी के नाम पर वोट की अपील नहीं की गई है। साफ दिख रहा कि भाजपा मोदी और कमल को लेकर ही चल रही है। वहीं, दूसरी ओर कांग्रेस का पूरा फोकस गहलोत और उनकी योजनाओं पर है। कुल मिलाकर राजस्थान का चुनाव मोदी और गहलोत के बीच है।

जोधपुर में गहलोत के सामने बीजेपी क्यों कोई नेता नहीं तलाश पाई?
जवाब देते हुए अजय अस्थाना ने कहा कि बीजेपी के लिए गहलोत के सामने किसी को खड़ा करना आसान फैसला नहीं था। गहलोत जी यहां से पांच बार जीत चुके हैं और अब छठी बार लड़ाई के लिए तैयार हैं। ऐसे में किसको सामने उतारा जाए, बीजेपी के लिए ये एक बड़ा सवाल था। बीजेपी ने गहलोत को उनके घर में घेरने लिए कई नामों पर मंथन किया, जिसमें गजेंद्र सिंह शेखावत और राज्यसभा सांसद राजेंद्र गहलोत थे। इसके बाद अंत में बीजेपी ने महेंद्र सिंह राठौड़, जो जेएनयू से रिटायर्ड प्रोफेसर हैं, उनको टिकट दिया। 

लोगों की राय में राजस्थान का सबसे प्रभावी मुद्दा रोजगार है, क्यों? 
वरिष्ठ पत्रकार मुकेश शर्मा ने इस सवाल पर प्रकाश डालते हुए कहा कि रोजगार के मुद्दे पर गौर करते हुए गहलोत सरकार ने इस बार जो सात गारंटी दी है, उनमें इस विषय को गंभीरता से शामिल किया है। इसके अलावा उन्होंने स्वास्थ्य पर भी ध्यान देते हुए जो काम किए किए हैं, उसका लोगों को लाभ मिला है और इस लाभ का लाभ कहीं न कहीं सरकार को भी मिलेगा।

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