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Rajasthan: पैरोल पर फरार एक लाख का इनामी हिस्ट्रीशीटर अजयपाल गिरफ्तार, पुलिस ने सूरत से पकड़ा, पत्नी बनी जरिया

Wed, 24 May 2023 11:33 AM IST
अरविंद कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जोधपुर

सार

राजस्थान पुलिस को बड़ी कामयाबी हाथ लगी है। टॉप-5 बदमाशों की लिस्ट में शामिल अजय पाल सिंह सूरत से गिरफ्तार कर लिया गया है। अजयपाल को पकड़ने के लिए पांच राज्यों की पुलिस 200 दिनों से तलाश कर रही थी।
 
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अजय पाल सिंह सूरत से गिरफ्तार - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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पिछले करीब पांच साल से पैरोल पर फरार चल रहे हत्या के आरोपी अजय पाल सिंह को जोधपुर पुलिस के आईजी रवि गौड़ और डीसीपी अमृता ने लंबे समय तक पीछाकर गिरफ्तार कर लिया है। दो साल पहले पुलिस कस्टडी में एक बंदी की दिनदहाड़े हत्या भी इसी ने की थी। करवड़ थाना क्षेत्र के रहने वाले हिस्ट्रीशीटर अजयपाल पर कई मर्डर करने के आरोप हैं। 

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अजय पाल तंवर के खिलाफ साल 2014 में महामंदिर थाने में हत्या का मुकदमा दर्ज हुआ था। फिर एससी-एसटी एक्ट और मर्डर केस में उसे उम्र कैद की सजा हुई। लंबे समय तक जेल में सजा काटने के दौरान साल 2019 में अजय पाल कोर्ट से पैरोल पर जेल से बाहर आया और फरार हो गया। इस आरोपी पर लूट की रकम के बंटवारे के विवाद में जालौर के आहार निवासी महेन्द्र खान की हत्या का भी आरोप है। गिरफ्तार होने के बाद पुलिस ने उसका एक वीडियो बनाया है, जिसमें वह युवाओं से पैसों के लिए अपराध नहीं करने की अपील कर रहा है और अपनी आप बीती बता रहा है।

फरारी के दौरान भी अजयपाल तंवर ने किए मर्डर...
18 दिसंबर 2021 को दिनदहाड़े पाली जिले के डरी गांव निवासी सुरेश सिंह रावणा राजपूत की जोधपुर के रातानाडा थाना क्षेत्र में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। मामले में पाली के मणिहारी निवासी जब्बर सिंह राजपूत, प्रवीण सिंह राजपूत और भरत सिंह ने आपसी रंजिश के चलते सुरेश सिंह की हत्या करवा दी थी। मर्डर करने वाला अजय पाल तंवर बताया जाता है। आरोपी प्रवीण सिंह मणिहारी ने इस मामले में पहले ही कोर्ट में सरेंडर कर दिया था। पुलिस ने प्रवीण सिंह के पिता जब्बर सिंह मणिहारी को 22 दिसंबर 2021 को गिरफ्तार किया था। मामले में जोधपुर पुलिस को अजय पाल तंवर की तलाश थी। कुछ महीने पहले भी जोधपुर पुलिस ने हिस्ट्रीशीटर जब्बर सिंह के फॉर्म हाउस पर अजय पाल को पकड़ने के लिए छापेमारी की थी, लेकिन वह फरार हो गया था। फरारी के दौरान जब्बर सिंह ने उसकी काफी मदद की, ऐसी जानकारी पुलिस को मिली है।
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दो साल से कई जगह रेड मारी...
जोधपुर पुलिस इस कुख्यात अपराधी को पिछले करीब छह महीने से लगातार ट्रैस करने की कोशिश में जुटी थी। आखिरकार, सोमवार को अजय पाल तंवर गुजरात के सूरत में पकड़ा गया। उसे पुलिस रात को जोधपुर लाकर पहुंची और आज कोर्ट में पेश करेगी। पुलिस ने आरोपी को पकड़ने के लिए पिछले करीब छह महीनों में पांच राज्य में 40 से ज्यादा टीमें भेजी और एक लाख किलोमीटर की यात्रा की।

अजय पाल को पकड़वाने में पत्नी बनी जरिया...
अजय पाल तंवर को पकड़वाने में उसकी पत्नी ही पुलिस के लिए जरिया बनी। उसकी पत्नी नहीं चाहती थी कि हिस्ट्रीशीटर और शूटर पति पकड़ा जाए। पत्नी को यह भी नहीं पता था कि जोधपुर पुलिस लगातार उससे भी ट्रैस कर रही है। बदमाश की पत्नी अपने पति से मिलने जैसे ही पहुंची, तो पुलिस को इसकी भनक लग गई। पुलिस ने अजय पाल की पत्नी से फिर कड़ाई से पूछताछ की, तो उसकी सलवार की सिलाई में से आरोपी पति के फोन नंबर और सिग्नल एप के पासवर्ड मिले। पत्नी से यह अपराधी रोजाना रात को फोन पर बात करता था।

डीसीपी अमृता ने बताया- किस तरह फरार हिस्ट्रीशीटर अजय पकड़ा गया...
जोधपुर पुलिस ने करीब छह महीने पहले अजयपाल को ढूंढने का प्लान तैयार किया था। पुलिस ट्रौस करने के बाद पहले सूरत पहुंची, उसकी पत्नी को जोधपुर लेकर आई। फिर उसे करवड़ थाना क्षेत्र में अजयपाल के घर छोड़ा दिया गया। इसके बाद से पुलिस अजयपाल की पत्नी की गतिविधियों पर नजर रख रही थी। पुलिस को वह इस बीच तीन बार घर से गायब मिली, शक होने पर पूछताछ की गई। लेकिन अजयपाल की पत्नी ने ठिकाना नहीं बताया। पुलिस ने उसे अपराधी पति अजयपाल की मदद करने के आरोप में जेल में डालने का डर दिखाया, तो उसने पुलिस को सारी बात बताते हुए कहा कि वह अपने पति अजयपाल से एक नंबर पर बात करती है। इस नंबर को उसने अपनी सलवार की सिलाई में छिपाकर रखा हुआ था। पुलिस को उसने नंबर और पासवर्ड सौंप दिया। यह पासवर्ड अजय पाल तंवर की उस ईमेल आईडी का निकला, जिससे वो सिग्नल मोबाइल एप का इस्तेमाल करता था।

अपराधियों को सिग्नल एप से खास लगाव...
बदमाश अजयपाल की पत्नी ने पुलिस को पूछताछ में बताया कि वह रोजाना रात को पति अजयपाल से बातें करती थी। अजय पाल ने उसे मोबाइल दे रखा है, जिसे उसने पशु बाड़े में छिपाकर रखा हुआ है। पुलिस या किसी अन्य को संदेह नहीं हो और फोन हाथ नहीं लगे इसलिए बकरियों के मल-मूत्र के बीच पॉलिथीन और पैकेट में लपेटकर वह मोबाइल को रखती है। अजयपाल ने ही सिग्नल एप पर अपनी पत्नी की आईडी बना रखी थी। बदमाश की पत्नी से जब्त कागजात में उसके भी नंबर और पासवर्ड पुलिस को मिल गए, जिसके जरिए पति-पत्नी दोनों रात में एप के माध्यम से बातें किया करते।

जोधपुर पुलिस डीसीपी अमृता दुहन ने बताया कि अजयपाल को गिरफ्तार करने से पहले उसके नेटवर्क को क्रैक किया गया। उसकी मदद करने वाले साथियों को गिरफ्तार किया गया। जो अजयपाल की फरारी में और आर्थिक रूप से मदद कर रहे थे। अजयपाल का नेटवर्क टूटने पर सभी ने उससे दूरी बना ली। तब वह दर-दर की ठोकरें खाने और भुखमरी को मजबूर हो गया। उसके साथियों ने भी मदद से साफ इनकार कर दिया और उससे संपर्क करना बंद कर दिया। तब कुछ महीने पहले अजयपाल पुणे में एक दुकान के ऊपर बनी चॉल में रहने लग गया। लेकिन उसके पास खाने को कुछ नहीं था और करने को कुछ काम भी नहीं था। तो पुणे में एक चाय की दुकान पर उसे बर्तन माजने पड़े। दिन-रात वह बर्तन धो-धो कर गुजारा करना पड़ा। उसे पुलिस के पुणे पहुंचने की भनक लग गई, तो वह भेष और हुलिया बदलकर वहां से भाग गया। वह फिर से सूरत आ गया, जहां से पकड़ा गया।

फोन पर सिग्नल एप से कोड लैंग्वेज में बात करता था अजयपाल...
अजय पाल सिंह तंवर की फोन पर पुलिस को लोकेशन न मिले, इसलिए बात करने के लिए सिग्नल एप यूज करता था। इन दिनों ज़्यादातर शातिर अपराधी इसी एप का इस्तेमाल करते हैं। क्योंकि इसमें बातचीत सीक्रेट रहती है। इसके सर्वर भी विदेश में हैं। डायरेक्ट बात करने की बजाय कोड लैंग्वेज में ही अजयपाल अपने साथियों और मददगारों से बात करता था। उसे बात करने से पहले भी कोड में मैसेज मिलते थे, तभी वह बात करता था। सामने वाला सिंगल डॉट लिखकर मैसेज करता। तो सब नार्मल है और बात कर सकता है का संदेश छिपा होता। दो डॉट के बदले में यदि एक डॉट का रिप्लाई आता तो मतलब होता कि स्थिति नॉर्मल नहीं है और अभी बात नहीं हो सकती है। तीन डॉट के मैसेज का मतलब होता कि पुलिस पहुंच रही है और उसे इशारा दिया जाता है कि जहां पर अभी है, वो जगह तुरंत छोड़ दे।

मारवाड़ी व्यापारियों से ली मदद...
पुलिस की जानकारी में आया है कि अजय पाल सिंह तवर ने बीते दो साल में गुजरात-सूरत, बड़ौदा, अहमदाबाद, महाराष्ट्र-पुणे-मुम्बई, गोवा, कर्नाटक-बेंगलुरु, मध्यप्रदेश-भोपाल-इंदौर, उज्जैन, नीमच, आंध्रप्रदेश-हैदराबाद समेत कई जगह फरारी काटी है। उसने ज़्यादातर मारवाड़ी व्यापारियों को निशाना बनाकर और डरा-धमकाकर मदद ली। उसने व्यापारियों का वॉट्सएप ग्रुप भी बना रखा था, जिससे वह वसूली करता था। उसने दो बार लूट की कोशिश की, लेकिन नाकाम रहा। कर्नाटक में एक ज्वेलर से बैग लेकर भागने की कोशिश की, लेकिन भीड़ के कारण सफल नहीं हो पाया। अजयपाल के पकड़े जाने के बाद अब पुलिस को उसके साथी बदमाश प्रवीण के भी जल्द पकड़ में आने की उम्मीद है। अजयपाल जालोर के हिस्ट्रीशीटर रघु रोकड़ा का भी खास रहा है।

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