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Rajasthan News: बड़े बेटे की बीमारी से टूटा परिवार, मां और दो बेटों ने किया सुसाइड, घर से मिली जहर की बोतल

Fri, 10 Apr 2026 11:41 AM IST
Ashutosh Pratap Singh न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पाली

सार

पाली की आशापुरा टाउनशिप में एक ही परिवार के तीन सदस्यों मां और दो बेटों के शव घर के अंदर मिलने से हड़कंप मच गया। बड़ा बेटा फंदे से लटका मिला, जबकि मां और छोटे बेटे के शव फर्श पर पड़े थे।
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पाली में दिल दहला देने वाली घटना - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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राजस्थान के पाली जिले की एक पॉश कॉलोनी उस समय सनसनी और मातम में डूब गई, जब एक ही घर के भीतर मां और उसके दो बेटों के शव बरामद हुए। जोधपुर रोड स्थित आशापुरा टाउनशिप में रहने वाले इस परिवार ने बीमारी और मानसिक तनाव (डिप्रेशन) के चलते मौत को गले लगा लिया। घर दो दिनों से भीतर से बंद था और जब पुलिस दरवाजा तोड़कर अंदर दाखिल हुई, तो मंजर देख सबकी रूह कांप गई।
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दुर्गंध ने खोला राज: कमरे में बिखरी थीं लाशें
9 अप्रैल की शाम करीब 6 बजे इस खौफनाक घटना का खुलासा हुआ। आशापुरा टाउनशिप के एक मकान से पिछले दो दिनों से कोई हलचल नहीं थी। जब आसपास के लोगों को घर से तेज दुर्गंध आने लगी, तो उन्होंने पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर जब दरवाजा तोड़ा, तो अंदर शांति देवी (59) और उनके छोटे बेटे रघुवीर (26) के शव फर्श पर पड़े थे, जबकि बड़े बेटे नरपत लाल (34) का शव पंखे से लटका मिला।

मौसेरे भाई ने दी थी पुलिस को सूचना
सबसे पहले नरपत के मौसेरे भाई लक्ष्मण ने शवों को देखा। लक्ष्मण के मुताबिक, 8 अप्रैल को नरपत से उसकी बात हुई थी। नरपत ने बताया था कि उसके शरीर पर घाव हो रहे हैं और उनमें मवाद भर गया है, इसलिए उसे अस्पताल ले जाना होगा। जब लक्ष्मण शाम को उनके घर पहुँचा और बार-बार दरवाजा खटखटाने पर भी कोई जवाब नहीं मिला, तो उसने औद्योगिक नगर थाना पुलिस को सूचित किया।
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जांच करती पुलिस - फोटो : अमर उजाला
पिता की मौत के बाद बिखर गया था परिवार
इस परिवार की त्रासदी करीब 2 साल पहले शुरू हुई थी, जब नरपत के पिता मांगीलाल की बाथरूम में नहाते समय हार्ट अटैक से मौत हो गई थी। पिता मिल में काम करते थे और उन्होंने मेहनत से यह नया मकान खरीदा था। पिता के जाने के बाद घर की जिम्मेदारी दोनों बेटों पर थी, लेकिन बीमारी ने इस हंसते-खेलते परिवार को खत्म कर दिया।

सुसाइड नोट में छलका 'बीमारी और डिप्रेशन' का दर्द
पुलिस को तलाशी के दौरान मौके से एक सुसाइड नोट और दो मोबाइल फोन मिले हैं। सुसाइड नोट में साफ तौर पर लिखा है कि परिवार गंभीर बीमारी और उससे उपजे डिप्रेशन के कारण यह आत्मघाती कदम उठा रहा है। नरपत एक ऑयल कंपनी में काम करता था, लेकिन शरीर के घावों के कारण उसने 8 महीने पहले नौकरी छोड़ दी थी। वहीं, छोटा भाई रघुवीर एक मोबाइल शॉप पर काम करता था और मां शांति देवी भी अक्सर बीमार रहती थीं।

पड़ोसी से कहा था- 'फोन मत करना, सीधा दरवाजा खटखटाना'
नरपत के पड़ोसी सौरभ ने बताया कि 8 अप्रैल को उसकी नरपत से मुलाकात हुई थी। नरपत ने उसे इलाज के लिए अस्पताल साथ चलने को कहा था। उसने सौरभ से खास तौर पर कहा था— "शाम को घर आना, मेरा मोबाइल बंद रहेगा इसलिए कॉल मत करना, सीधे दरवाजा खटखटाना।" सौरभ व्यस्तता के कारण उस दिन नहीं जा सका, और अगले दिन उसे इस सामूहिक सुसाइड की खबर मिली।
 
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मौके पर मौजूद पुलिस - फोटो : अमर उजाला
व्हाट्सएप पर भेजे दस्तावेज और फोटो
मरने से पहले नरपत ने अपने कुछ रिश्तेदारों को अपना, अपने भाई और मां का फोटो, आधार कार्ड और जन आधार कार्ड व्हाट्सएप किए थे। इससे यह अंदेशा होता है कि उसने पूरी योजना के तहत इस घटना को अंजाम दिया। पुलिस को दो शवों के पास से जहर की बोतल भी बरामद हुई है।

पुलिस और जांच टीम मौके पर
घटना की गंभीरता को देखते हुए एसपी मोनिका सेन ने मामले के जल्द खुलासे के निर्देश दिए हैं। मौके पर एफएसएल (FSL) और एमओबी (MOB) की टीमों ने पहुंचकर साक्ष्य जुटाए हैं। औद्योगिक नगर थाना प्रभारी निरमा बिश्नोई के अनुसार, पुलिस सुसाइड और अन्य सभी संभावित पहलुओं से मामले की गहराई से जांच कर रही है। फिलहाल तीनों शवों को बांगड़ अस्पताल की मॉर्च्युरी में रखवाया गया है।
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