देश भर में आज करवा चौथ का त्योहार मनाया जा रहा है। करवा चौथ पर महिलाएं अपने पति की लंबी आयु की कामना के लिए व्रत रखती हैं और रात्रि में चांद को अर्क देने के साथ अपना उपवास खोलती हैं। हिन्दू धर्म में व्रत की यह परंपरा सदियों से चली आ रही है। महिलाएं आज पूरे सोलह शृंगार के साथ चौथ माता का पूजन करेंगी।
करवा चौथ को देखते हुए परंपरागत रूप से अब करवे भी बाजारों में उपलब्ध हैं। ऐसे में अमर उजाला जोधपुर टीम ने करवा बनाने वाले कुम्हार से बातचीत करके पता किया कि कैसे तैयार होते हैं करवे और क्यों किया जाता है मिट्टी के करवे का पूजन।
सनातन धर्म के अनुसार करवा पंच तत्वों का प्रतीक माना गया है, जल, मिट्टी, अग्नि, आकाश और वायु। इन्हीं पंच तत्वों से मनुष्य का शरीर भी बना है। मान्यता है कि यह सभी तत्व दांपत्य जीवन को खुशहाल बनाए रखने के लिए आवश्यक हैं। करवा चौथ के शुभ अवसर पर करवे को मां देवी का प्रतीक मानकर सुहागिन महिलाएं पूजा-अर्चना करती हैं। कुम्हारों के घरों में सदियों से करवा बनाने का काम चल रहा है। पूजन की थाली में सबसे महत्वपूर्ण होता है मिट्टी का बना करवा हालांकि कई लोग शक्कर से बने करवों का भी पूजन करते हैं।
आजकल रंग-बिरंगे रंगों से उकरे करवे और भी भव्य बनाने की कला उभर रही है। करवा तैयार करने वाली कोमल प्रजापत ने बताया कि करवा विशेष मिट्टी से तैयार किया जाता है यह विशेष प्रकार की मिट्टी रात को भिगोकर रखी जाती है सुबह उसे सांचे में डालकर करवा तैयार किया जाता है और उसके बाद उस पर रंग-बिरंगे चित्र उकेरे जाते हैं ताकि उन्हें और सुंदर बनाया जा सके और उनकी बिक्री बढ़ सके।