केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री और जोधपुर सांसद गजेंद्र सिंह शेखावत के प्रयासों से राजस्थान के खनिज उद्योग को बड़ी सौगात मिली है। लाइमस्टोन खदानों को माइनर से मेजर में बदलने का रास्ता अब पूरी तरह साफ हो गया है, जिससे जोधपुर, नागौर और ब्यावर क्षेत्रों के 500 से अधिक खनन पट्टा धारकों को सीधा लाभ मिलेगा। यह मामला पिछले 10 वर्षों से लंबित था।
वर्षों से लंबित मांग हुई पूरी
राजस्थान सरकार ने वर्ष 2016-17 में लाइमस्टोन को मेजर मिनरल की श्रेणी में स्वीकार कर लिया था, लेकिन इसके बाद माइनर खदानों की नई फाइलों को लंबित रखा गया था। केंद्र और राज्य सरकार के बीच सचिव स्तर पर कई दौर की चिट्ठीचारियों के बाद माइनर पट्टों को रद्द कर नीलामी में डालने के निर्देश दिए गए थे। इस फैसले का खनन पट्टा धारकों ने विरोध किया और राहत की मांग को लेकर दिल्ली पहुंचे।
केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने की केंद्रीय मंत्रियों से चर्चा
जोधपुर जिला माइंस ऑनर एसोसिएशन के अध्यक्ष जितेन्द्र सिंह नरुका के नेतृत्व में खनन क्षेत्र से जुड़े प्रतिनिधियों ने दिल्ली में केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत से मुलाकात की। शेखावत ने यह मामला केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री प्रह्लाद जोशी, खान राज्यमंत्री जी. कृष्णा रेड्डी और विभागीय अधिकारियों के समक्ष उठाया। इसके बाद केंद्र सरकार ने माइनर माइंस को रद्द करने की बजाय उन्हें मेजर माइंस में बदलने का निर्णय लिया।
ये भी पढ़ें: भीलवाड़ा में तस्कर और पुलिस के बीच भिडंत, गाड़ी के टायर में लगी गोली तब भी भाग निकले
चार हेक्टेयर भूमि धारकों को मिलेगा खनन पट्टा
नई व्यवस्था के तहत अब चार हेक्टेयर भूमि वाले किसानों को मेजर मिनरल का खनन पट्टा जारी किया जा सकेगा। इस संबंध में संसद में भी प्रस्ताव रखा गया है, जिससे क्षेत्र में खनन कार्य को बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे।
11 दौर की बैठकें बनीं समाधान की नींव
इस निर्णय से पहले एसोसिएशन के पदाधिकारियों और केंद्र सरकार के बीच 11 दौर की बैठकें हुईं, जिनमें किसानों को खनन उद्योग से जोड़ने और स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन के मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई। अंततः केंद्र सरकार ने सकारात्मक निर्णय लेते हुए माइनर लाइमस्टोन खदानों को मेजर में बदलने की अनुमति दे दी।
प्रतिनिधिमंडल में कई जिलों से पहुंचे खान मालिक
केंद्रीय मंत्री शेखावत से मिलने पहुंचे प्रतिनिधिमंडल में जोधपुर, नागौर और ब्यावर से बड़ी संख्या में खनन पट्टा धारक और किसान शामिल रहे। प्रतिनिधिमंडल में मानसिंह नरुका, मोतीलाल बौहान, नारायणसिंह राठौड़, देवीसिंह राठौड़, उपेंद्र सिंह भाटी, कानसिंह भदावत, रणवीरसिंह चंपावत सहित करीब 40 से अधिक सदस्य शामिल थे।
रोजगार और उद्योग को मिलेगा बढ़ावा
इस फैसले से न सिर्फ लंबे समय से संघर्षरत खान मालिकों को राहत मिली है, बल्कि इससे खनन उद्योग को गति, स्थानीय युवाओं को रोजगार और राज्य सरकार को राजस्व मिलने की भी संभावना है। एसोसिएशन ने इस निर्णय को खनिज क्षेत्र के लिए मील का पत्थर बताया है।