केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने निकाय चुनाव में कांग्रेस पर जानबूझकर भ्रम फैलाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस मगरमच्छी रुदन कर जनता में भ्रम फैलाने का असफल प्रयास कर रही है, जो न केवल दुर्भाग्यपूर्ण है, बल्कि विपक्ष की व्यावसायिक नैतिकता पर भी एक प्रश्न है।
रविवार को अपने एक बयान में केंद्रीय मंत्री शेखावत ने कहा कि पूर्व में राज्यभर में सभी निकायों के चुनाव चाहे वह पंचायत निकाय हो या वह शहरी निकाय हो, अलग-अलग तिथियों को होते थे, कभी किसी पालिका के चुनाव तो कभी किसी पालिका के चुनाव और इधर कभी किसी पंचायत के चुनाव तो कभी किसी पंचायत के चुनाव होते थे। निकाय चुनावों को लेकर कभी एकरूपता का भाव राज्य में पैदा ही नहीं हुआ था। उन्होंने कहा कि कह सकते हैं कि राज्य में निकायों के चुनाव आज तक किश्तों में हुए थे, किन्तु इस बार की भजनलाल सरकार ने दृढ़ राजनीतिक इच्छाशक्ति दिखाते हुए इन सब निकायों के चुनावों को एक साथ करने का निर्णय लिया। इस दिशा में कदम उठाए और अंततः अब निकाय चुनाव एक साथ होने का मार्ग लगभग प्रशस्त हो गया, जो काफी कठिन और चुनौती पूर्ण कार्य था।
शेखावत ने कहा कि कांग्रेस यह जानते हुए भी कि सभी निकायों के चुनाव एक साथ करवाने के लिए जहां जिस निकाय का कार्यकाल पूरा हो है, उसे अन्य निकायों के कार्यकाल के पूरे होने तक रुकना ही होगा, फिर भी कांग्रेसी नेता जनता को मीडिया में अनर्गल तर्क देते हुए उकसाने करने की कोशिश कर रहे हैं। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि जनता को संयम रख एक तिथि में चुनाव करवाने के आशय को स्पष्ट करने की जगह कांग्रेस अपने रटे-रटाए संविधान खतरे में है, के तर्क को ही दोहराती रही, ताकि राज्य की जनता अधीर हो जाए। भजनलाल सरकार की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न लगाए, किन्तु जनता कांग्रेस के बहकावे में कतई नहीं आई और संयम के साथ एक राज्य-एक चुनाव की राज्य सरकार की इच्छाशक्ति को समझा है।
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शेखावत ने कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के संविधान खतरे में है, जैसे वक्तव्यों पर निशाना साधते हुए कहा कि स्वयं पूर्व मुख्यमंत्री गहलोत ने अपने पिछले कार्यकाल में जोधपुर, जयपुर और कोटा नगर निगम के चुनाव अपने राजनीतिक स्वार्थों के चलते प्रशासक लगाकर एक वर्ष देर से करवाए थे। हो सकता है कि पूर्व मुख्यमंत्री गहलोत इन चुनावों की देरी की वजह कोरोना को बताएं, किन्तु निगम के चुनाव नवम्बर 2019 में होने थे, जिसे गहलोत ने प्रशासक लगा पहले से ही लंबित कर दिए थे, जबकि कोरोना का आगमन मार्च 2020 में हुआ था।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि अपनी तरफ से की गई इस एक सालाना देरी में तो गहलोत को संविधान खतरे में नजर नहीं आया। लेकिन राज्य की वर्तमान भाजपा सरकार द्वारा पुनीत लक्ष्य और राज्य हित में एक साथ चुनाव करवाने के प्रयास में इन्हें संविधान खतरे में दिख रहा है। शेखावत ने चुटकी लेते हुए कहा है कि गहलोत और कांग्रेस को इन चुनावों में अपना अस्तित्व खतरे में दिख रहा है। इसलिए वो अनर्गल रुदन कर अपने बचाव की भूमिका बांध रहे हैं।
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