पढ़ाई में हमेशा अव्वल रहने वाली मंजू को यह नहीं पता था कि जीवन में ऐसी विकट परिस्थितियां आ जाएंगी कि उसे अपनी पढ़ाई से हाथ धोना पड़ेगा। जीवन में कुछ कर गुजरने का सपना देखने वाली मंजू का ये ख्वाब उसके भाई के गंभीर अपराध में जेल जाने के बाद बिखर गया लेकिन अदालत की पहल ने उसके सपनों को फिर से नए पंख दे दिए।
यह मामला है जोधपुर का। 21 वर्षीय मंजू सीरवी ने अपने भाई की पैरोल के लिए हाईकोर्ट से गुहार लगाई। उसने अपनी पढ़ाई का हवाला देते हुए जज साहब से अपने भाई को पैरोल पर रिहा करने की मांग की।
मंजू ने कोर्ट को बताया कि उसके माता-पिता बुजुर्ग हैं और मजदूरी करते हैं, वह उसकी पढ़ाई का खर्च नहीं उठा सकते। मेरा भाई ही मेरी पढ़ाई का खर्च उठा रहा था लेकिन उसके जेल जाने के बाद मेरी पढ़ाई छूट गई है।
उसने कहा कि वह जीवन में कुछ बनना चाहती है, कुछ करना चाहती है, इसलिए उसके भाई को रिहा कर दिया जाए।