उपचुनाव के लिए बीजेपी ने झुंझुनू से राजेंद्र भांबू को प्रत्याशी घोषित किया है। यह सीट यूं तो कांग्रेस का किला मानी जाती है। इसके पीछे वजह भी है। पिछले 12 विधानसभा चुनावों में बीजेपी यहां सिर्फ 2 बार जीती है। जिसमें एक 1996 का उपचुनाव भी है। इसकी बड़ी वजह है बीजेपी के पास यहां कोई बड़ा जाट चेहरा नहीं रहा। प्रत्याशी मिलते भी हैं तो निर्दलीय खेल बिगाड़ देते हैं।
ऐसे बिगड़ा भाजपा का खेल
साल 2023 के विधानसभा चुनावों में बीजेपी ने निशीत कुमार उर्फ बबलू को टिकट दिया था। लेकिन, भांबू ने निर्दलीय चुनाव लड़कर खेल बिगाड़ दिया और चुनाव कांग्रेस के बृजेंद्र ओला जीत गए। भांबू निर्दलीय मैदान में उतरकर 40 हजार से ज्यादा वोट ले गए। वहीं, झुंझुनू से राजेंद्र भांबू जब 2018 में बीजेपी के उम्मीदवार थे, तब बबलू ने बगावत की थी। उस वक्त बबलू चौधरी निर्दलीय चुनाव लड़े और करीब 30 हजार वोट तीसरे नंबर पर रहे और राजेंद्र भांबू कांग्रेस के बृजेंद्र ओला के सामने यह चुनाव हार गए।
कांग्रेस का टिकट ओला परिवार को
हालांकि, कांग्रेस ने उपचुनावों के लिए अपने प्रत्याशियों का ऐलान नहीं किया है। लेकिन, संभावना यही है कि कांग्रेस यहां ओला परिवार को अपना टिकट देगी। बीते 4 विधानसभा चुनावों में कांग्रेस के टिकट पर यहां बृजेंद्र ओला चुनाव जीत रहे हैं। साल 2023 में कांग्रेस के टिकट पर बृजेंद्र ओला यहां से चुनाव जीते, लेकिन लोकसभा चुनावों में कांग्रेस ने बृजेंद्र ओला को प्रत्याशी बना दिया। ओला के लोकसभा चुनाव जीतने के चलते यह सीट खाली हुई है। अब संभावना यही है कि कांग्रेस इस सीट पर बृजेंद्र ओला के बेटे को प्रत्याशी बनाए।