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Lok Sabha Chunav: झुंझुनू में आठ में से छह विधानसभा सीटों पर कांग्रेस का कब्जा, भाजपा को करनी पड़ेगी मशक्कत

Mon, 01 Apr 2024 06:45 PM IST
हिमांशु प्रियदर्शी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, झुंझुनू

सार

Lok Sabha Chunav 2024: लोकसभा चुनाव के लिए भाजपा 'चार सौ पार' का राग अलाप रही है। जबकि विपक्षी पार्टियां लोकतंत्र बचाओं के तहत चुनाव प्रचार में टिकने की कोशिश कर रही हैं। किसी सीट पर भाजपा तो किसी सीट पर मुकाबले में है, लेकिन झुंझुनू सीट की कहानी अलग है। पढ़ें पूरी रिपोर्ट...।
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राजस्थान लोकसभा चुनाव। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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मौजूदा लोकसभा चुनाव में कांग्रेस की संभावनाओं वाली सीटों में से झुंझुनू एक है। यहां मुकाबला कांग्रेस के बृजेंद्र ओला और भाजपा के शुभकरण चौधरी के बीच है। विधानसभा चुनावों में यहां की आठ सीटों में से छह पर कांग्रेस को जीत मिली थी। बीजेपी के खाते में सिर्फ दो सीटें आईं।

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झुंझुनू लोकसभा सीट भाजपा के लिए बनी चुनौती
गृह मंत्री अमित शाह ने सीकर के बाद अब जोधपुर में भी ‘अब की बार 400 पार’ का नारा लगा दिया। दूसरी, तरफ कांग्रेस के नेताओं की तरफ से मजबूरी में चुनाव लड़ने जैसे बयान आ रहे हैं। लेकिन इन सब के बीच भी कांग्रेस के लिए कुछ सीटें ऐसी हैं जो उम्मीद जगाती हैं। इनमें झुंझुनू भी एक है। विधानसभा के हिसाब से देखें तो इस लोकसभा सीट की आठ विधानसभा सीटों में से छह पर कांग्रेस के विधायक हैं। जबकि बीजेपी के पास सिर्फ दो विधायक हैं।

दूसरी, तरफ कांग्रेस के प्रत्याशी बृजेंद्र सिंह ओला के पास शीशराम ओला की राजनीतिक विरासत है। वहीं, बीजेपी में भी हालात असहज हैं। बृजेंद्र के पक्ष में एक बात ये भी है कि वे जीत जाते हैं तो झुंझुनू विधानसभा सीट खाली हो जाएगी। इस पर जीतने की संभावना बनती है। ऐसे में उनके खिलाफ भितरघात की आशंकाएं कम होती हैं।
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बृजेंद्र ओला की राजनीतिक विरासत पर एक नजर

  • 1996 में कांग्रेस के भीतर टूटन आई और कैप्टन अय्यूब भी खड़े हुए तो शीशराम ओला को AIIC(T) ने टिकट दिया। भाजपा ने मातूराम सैनी को उतारा। ओला जीते और कैप्टन अय्यूब तीसरे स्थान पर रहे। 1998 में शीशराम ओला AIIC(S) जीते। उन्होंने भाजपा के मदनलाल सैनी को हराया और कांग्रेस के जगदीप धनखड़ तीसरे स्थान पर रहे।
  • 1999 में शीशराम ओला इस बार कांग्रेस की टिकट पर जीते और भाजपा के बनवारीलाल सैनी को हराया। इस चुनाव में सुमित्रा सिंह निर्दलीय खड़ी हुईं और तीसरे नंबर पर रहीं।
  • 2004 में शीशराम ओला फिर कांग्रेस के टिकट पर खड़े हुए और उन्होंने बीजेपी की प्रत्याशी संतोष अहलावत को हराया।
  • 2009 में शीशराम ओला ने एक बार फिर यहां कांग्रेस का परचम लहराया। बीजेपी के दशरथ सिंह शेखावत को हराया।
  • 2014 में इस चुनाव में शीशराम ओला खड़े नहीं हुए, बल्कि कांग्रेस के टिकट पर उनकी बहू और बृजेंद्र सिंह ओला की पत्नी राजबाला चुनाव के मैदान में उतरीं। लेकिन वह बीजेपी की प्रत्याशी संतोष अहलावत से हार गईं।
  • 2019 में नरेंद्र कुमार बीजेपी से सांसद बने। इनके सामने मुकाबले में कांग्रेस के श्रवण कुमार थे।
  • लेकिन अब विरासत की राजनीति के उत्तराधिकारी बृजेंद्र सिंह ओला एक बार फिर से अपनी सियासी जमीन पर चुनाव लड़ रहे हैं।
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