अस्पतालों में मम्प्स बीमारी के टिके नहीं
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झुंझुनूं के सरकारी अस्पतालों में टीके लगवाने को लेकर आ रहे परिजनों को बैरंग लौटना पड़ रहा है।दरअसल, डेंगू और मलेरिया के साथ मम्पस के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। जिले में हर दिन 20 से 25 बच्चे मम्पस की चपेट में आ रहे हैं। लेकिन सरकारी अस्पतालों में टीके अभी तक नहीं पहुंचे।
वरिष्ठ शिशु रोग विशेषज्ञ डॉक्टर जितेंद्र भाम्बू ने बताया कि राजकीय बीडीके अस्पताल झुंझुनूं में मम्पस के उपचार की पूर्ण सुविधाएं उपलब्ध हैं। मम्पस से गंभीरता काफी कम है। मरीज 3-5 दिन में ठीक हो रहे हैं, फिर भी भर्ती होने पर पूर्ण उपचार की सुविधा उपलब्ध है। एक बार मम्पस होने के बाद दोबारा नहीं होता है, इससे इम्यूनिटी बन जाती है।
यूआईपी प्लान में टीकाकरण नहीं है, परंतु असहयोगात्मक एवं लक्ष्यनात्मक उपचार से अधिकांश रोगियों को स्वस्थ किया जा सकता है। जबड़े में सूजन के चलते भारी खाना खाने से दर्द होता है। निगलने में दिक्कत होती है। यह करीबी व्यक्तिगत संपर्क में आने से एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैलता है। उन्होंने बताया कि अभिभावक इसे लापरवाही नहीं बरते। मम्पस का उपचार थोड़ा कठिन है। क्योंकि यह एक वायरस है। इसलिए यह अन्य दबाव और एंटीबायोटिक दवाइयों पर भी प्रतिक्रिया नहीं करता।