जिले में हुई पहली बारिश ने प्रशासन के दावों की सारी पोल खोलकर रख दी है। बिजली विभाग को तीन दिन पहले खंभे से आ रहे करंट की सूचना के बावजूद विभाग ने कोई एक्शन नहीं लिया, नतीजतन 5 लोगों को करंट लग गया। इनमें से एक 17 साल के जहांगीर की मौत हो गई, जबकि एक अन्य गंभीर घायल को जयपुर रैफर किया गया है।
गौरतलब है कि कल दोपहर में हो रही मूसलाधार बारिश के दौरान जगदीश, मनीष, जहांगीर, साजिद और एक अन्य युवक केबिन में थे। केबिन के पास लगे बिजली के खंभे से पांचों करंट की चपेट में आ गए। सड़क पर घुटनों तक बह रहे पानी में सभी ने दौड़कर जान बचाने की कोशिश की। इस दौरान चार लोग पानी में गिर गए और बहने लगे। जगदीश को 100 मीटर दूर तक बहने के बाद लोगों ने पकड़ लिया और अस्पताल पहुंचाया।
युवक की मौत के बाद परिजनों और ग्रामीणों के साथ 18 घंटे से धरना दे रहे राजेंद्र गुढ़ा का कहना है कि जब तक मांगें नहीं मानी जाएंगी, धरना यूं ही जारी रहेगा। उन्होंने अस्पताल पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि युवक को अस्पताल ले जाने के बाद ICU में एक भी डॉक्टर नहीं था। वहां मौजूद नर्स ने घायलों में से एक को जयपुर रैफर किया। गुढ़ा ने कहा कि चाहे जिले का एसपी हो, कलेक्टर हो या CMHO सभी ने मिलकर बेड़ा व्यवस्थाओं का बेड़ा गर्क कर रखा है।
धरने पर बैठे अन्य ग्रामीणों का कहना है कि पिछले 25 साल से यहां एकतरफा ओला परिवार वर्चस्व है लेकिन व्यवस्था के नाम पर सबकुछ जीरो है। ग्रामीणों का कहना था कि अब तक हमने गुढ़ा जैसा नेता नहीं देखा जो पिछले 18 घंटों से हमारे साथ बारिश में धरने पर बैठा है। गुढ़ा के अलावा अब तक शीर्ष प्रशासन या अन्य कोई नेता यहां नहीं आया। कुछ देर पहले यहां मौजूद पुलिस और गुढ़ा के बीच तीखी नोंकझोंक की खबर है।
मृतक जहांगीर के परिजनों की मांग है कि सरकार 50 लाख का मुआवजा और एक सरकारी नौकरी देने के साथ ही दोषी अधिकारियों पर कठोरतम कार्रवाई करे।