सरकारी स्कूलों में पहली कक्षा में प्रवेश की उम्र छह साल निर्धारित किए जाने के कारण प्रदेश के हजारों बच्चे स्कूलों में प्रवेश से वंचित रह गए हैं। अकेले झुंझुनू में उम्र की बाध्यता के कारण पहली कक्षा में प्रवेश लेने वाले साढ़े तीन हजार बच्चे दायरे से बाहर हो गए हैं, अब इन्हें बाल वाटिका, आंगनवाड़ी केंद्र या फिर गैर राजकीय विद्यालयों में एलकेजी, यूकेजी व नर्सरी में प्रवेश लेना पड़ेगा।
राजकीय व गैर राजकीय विद्यालयों में कक्षा एक में सीधे प्रवेश के लिए बच्चे की उम्र एक अक्टूबर को छह साल होना जरूरी है। हालांकि जो बच्चे राजकीय, गैर राजकीय विद्यालयों, आंगनबाड़ी केंद्रों व बाल बाटिकाओं में पहले से अध्ययनरत हैं, उन पर आयु गणना एक अक्टूबर 2024 की निर्धारित तिथि लागू नहीं होगी।
- मंड्रेला के वार्ड नंबर नौ निवासी आजम अली अपनी बेटी अलीना का कस्बे के राजकीय लाठ उच्च माध्यमिक विद्यालय में कक्षा एक में प्रवेश दिलाने के लिए गए, लेकिन बच्ची की उम्र छह साल से कम होने की वजह से प्रवेश देने से इंकार कर दिया गया। आजम बताते हैं कि अब उन्हें मजबूरीवश किसी निजी स्कूल में प्रवेश दिलाना होगा।
- पदमपुरा गांव के कृष्णकुमार अपने पुत्र कृष कुमार को गांव के सरकारी स्कूल में कक्षा एक में सीधे प्रवेश दिलाना चाहते थे लेकिन कृष की उम्र छह साल से कम होने की वजह सीधे प्रवेश के लिए विद्यालय प्रबंधन ने मना कर दिया। अब उसे निजी विद्यालय, आंगनबाड़ी केंद्र या बाल वाटिका में प्रवेश दिलाना पड़ेगा।
आर्थिक स्थिति कमजोर होने के चलते जो अभिभावक अपने बच्चों का प्रवेश गैर राजकीय विद्यालयों में नहीं दिला सकते हैं, उन्हें अब अपने बच्चों को आंगनबाड़ी केंद्र या महात्मा गांधी राजकीय विद्यालयों में संचालित बाल वाटिकाओं में प्रवेश दिलाना पड़ेगा। झुंझुनू जिले में 119 के करीब महात्मा गांधी विद्यालय संचालित हैं और इनमें 50 में ही बाल वाटिकाएं संचालित हैं। इसके अलावा जिले में 1595 आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हैं।
इनका कहना है
सरकारी व गैर सरकारी विद्यालयों में छह साल से कम उम्र के बच्चों को कक्षा एक में अब सीधे प्रवेश नहीं मिल सकेगा। बच्चे की उम्र 1 अक्टूबर 2024 को अगर छह साल की हो रही तो ही उसे प्रवेश दिया जाएगा। पहले से पढ़ने वाले बच्चों के लिए उम्र की यह बाध्यता नहीं रहेगी। प्रवेशोत्सव के दौरान छह साल से कम उम्र के साढ़े तीन हजार बच्चों के अभिभावक कक्षा एक में प्रवेश दिलाना चाह रहे थे, अब उन्हें कक्षा एक में प्रवेश नहीं मिल पाएगा। उन्हें बाल वाटिका या आंगनबाड़ी में प्रवेश दिलाना होगा।
-मनोज कुमार ढाका, डीईओ प्रारंभिक, झुंझुनू