राजस्थान की झुंझुनू विधानसभा क्षेत्र के उपचुनाव की तारीख का एलान होते ही राजनीतिक पार्टियों ने चुनावी चौसर बिछाना शुरू कर दिया है। उपचुनाव की घोषणा होते ही आचार संहिता लागू हो गई है। प्रशासन भी अलर्ट मोड पर आ गया है। कार्यक्रम के अनुसार झुंझुनू विधानसभा सीट पर 13 नवंबर को उपचुनाव होगा और 23 नवंबर को मतगणना होगी।
दोनों पार्टियों ने नहीं खोले पत्ते
उपचुनाव की घोषणा हो गई, लेकिन फिलहाल दोनों ही पार्टियों ने प्रत्याशियों को लेकर पत्ते नहीं खोले हैं। भाजपा नेताओं का मंगलवार को जिले में जमावड़ा भी रहा। जिले के प्रभारी मंत्री अविनाश गहलोत, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री सुमित गोदारा आदि ने यहां पदाधिकारियों व कार्यकर्ताओं से चर्चा कर नब्ज भी टटोली है।
1996 में हुआ था झुंझुनू में उपचुनाव
यह सीट कांग्रेस की परंपरागत सीट मानी जाती है। इस सीट पर अब तक हुए चुनावों में भारतीय जनता पार्टी दो बार ही जीती है। हालांकि उपचुनाव केवल एक बार 1996 में हुए, तब भाजपा के मूलसिंह शेखावत ने जीत हासिल की थी। शेखावत ने बृजेंद्र ओला को हराया था।
जिले में लगातार तीसरी बार उपचुनाव
झुंझुनू जिले में लगातार तीसरा अवसर है जब विधायक ने एमपी का चुनाव जीता है। वर्ष 2014 में भाजपा की संतोष अहलावत ने कांग्रेस की राजबाला ओला को हराकर लोकसभा का चुनाव जीता था। इससे सूरजगढ़ में उपचुनाव हुए। यहां भाजपा के दिगबर सिंह को हार का सामना करना पड़ा।
जीत कांग्रेस के श्रवण कुमार की हुई। इसके बाद वर्ष 2019 में भाजपा के नरेन्द्र कुमार ने कांग्रेस के श्रवण कुमार को हराकर लोकसभा चुनाव जीता। इससे मंडावा में उपचुनाव हुए। यहां कांग्रेस की रीटा चौधरी ने भाजपा प्रत्याशी सुशीला सीगड़ा को हराया।झुंझुनूं सीट पर पहले जब उप चुनाव हुआ था, तब शीशराम ओला के पहली बार सांसद बनने पर हुआ था। अब शीशराम के बेटे बृजेन्द्र ओला के सांसद बनने के कारण उपचुनाव होंगे। लोकसभा चुनाव के दौरान झुंझुनू विधानसभा क्षेत्र में दो लाख 75 हजार 919 मतदाता थे। इनमें दो लाख 72 हजार 519 आम मतदाता व 3400 सेवानियोजित मतदाता थे। हालांकि इनमें कुछ नए मतदाता भी जुड़े हैं।
इसलिए खाली हुई थी सीट
यह सीट लोकसभा चुनाव में बृजेंद्र ओला के सांसद बन जाने के बाद खाली हुई थीं। ओला ने 2023 के विधानसभा चुनाव में 28 हजार 863 वोटों के अंतर से भाजपा प्रत्याशी बबलू चौधरी को हराया था। इसके बाद कांग्रेस ने लोकसभा चुनाव में विधायक बृजेंद्र ओला को सांसद प्रत्याशी बनाकर मैदान में उतारा। लोकसभा चुनाव में ओला ने भाजपा प्रत्याशी शुभकरण चौधरी को 18 हजार 235 वोटों से शिकस्त दी थी।