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Jalore News: 7 रुपये की प्रेग्नेंसी किट के लिए 25 रुपये का भुगतान, मेडिकल उपकरण खरीद में बड़ा घोटाला उजागर

Fri, 09 Jan 2026 05:12 PM IST
जालौर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जालौर

सार

जालोर के सीएमएचओ कार्यालय में प्रेग्नेंसी टेस्ट किट सहित कई मेडिकल उपकरणों की खरीद में भारी अनियमितताएं सामने आई हैं। आरटीआई दस्तावेजों और विभागीय जांच समिति की रिपोर्ट से खुलासा हुआ कि बाजार कीमत से तीन गुना तक अधिक दरों पर उपकरण खरीदे गए हैं।
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जालोर सीएमएचओ में बड़ा घोटाला - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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राजस्थान के चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग में नियमों की अनदेखी कर सरकारी धन के दुरुपयोग का एक गंभीर मामला सामने आया है। जालोर के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय में प्रेग्नेंसी टेस्ट किट सहित विभिन्न मेडिकल उपकरणों की खरीद में लाखों रुपये के घोटाले का खुलासा हुआ है। यह मामला आरटीआई से प्राप्त दस्तावेजों और विभागीय जांच समिति की रिपोर्ट के बाद उजागर हुआ है, जिसने खरीद प्रक्रिया में भारी अनियमितताओं की पुष्टि की है।
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जांच में सामने आया है कि बाजार में बेहद कम कीमत पर उपलब्ध मेडिकल उपकरणों को तीन गुना तक अधिक दरों पर खरीदा गया। प्रेग्नेंसी टेस्ट किट, जिसकी बाजार कीमत करीब 7 रुपये बताई गई है, उसे 25 रुपये प्रति किट की दर से खरीदा गया। इसी तरह हीमोग्लोबिन मीटर की वास्तविक कीमत लगभग 10 हजार रुपये होने के बावजूद 28 हजार रुपये में भुगतान किया गया, जबकि ग्लूकोमीटर 3,750 रुपये के बजाय 9,500 रुपये में खरीदा गया। जांच रिपोर्ट के अनुसार इन खरीदों से एक विशेष फर्म को अनुचित लाभ पहुंचाया गया।

घोटाले का सबसे चौंकाने वाला पहलू सप्लाई और मैन्युफैक्चरिंग तिथियों में किया गया हेरफेर है। दस्तावेजों में प्रेग्नेंसी टेस्ट किट की सप्लाई 31 मार्च 2025 दर्शाई गई, जबकि उन्हीं किट्स पर मैन्युफैक्चरिंग डेट मई 2025 अंकित पाई गई। मामला उजागर होने के बाद रजिस्टर में काट-छांट कर तारीख बदलने की बात भी जांच रिपोर्ट में दर्ज है, जबकि भुगतान पहले ही मार्च में कर दिया गया था।
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सितंबर 2025 में सौंपी गई जांच समिति की रिपोर्ट के अनुसार टेंडर प्रक्रिया में भी गंभीर खामियां पाई गईं। अनुमति केवल सीमेन एनालिसिस किट की थी लेकिन टेंडर में मलेरिया, डेंगू, एचआईवी सहित कुल 45 आइटम शामिल कर दिए गए। जिन उत्पादों के लिए फर्म के पास आवश्यक OEM प्रमाण पत्र नहीं थे, उनके बावजूद उसे कार्यादेश जारी कर दिया गया। इसके अलावा 3.41 लाख यूरिन स्ट्रिप की जगह केवल 2.27 लाख की आपूर्ति कर करीब 6.37 लाख रुपये का अतिरिक्त नुकसान हुआ।

जोधपुर जोन के संयुक्त निदेशक कार्यालय द्वारा गठित तीन सदस्यीय समिति ने अपनी रिपोर्ट में सीएमएचओ डॉ. भैराराम जाणी सहित पांच अधिकारियों को सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराया है। इनमें उप मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, भंडार पाल, जिला कार्यक्रम प्रबंधक और जिला लेखा प्रबंधक भी शामिल हैं। समिति ने फर्म द्वारा प्रस्तुत जांच रिपोर्ट को भी फर्जी और संदिग्ध बताया है।
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हालांकि सीएमएचओ डॉ. भैराराम जाणी ने सभी आरोपों को निराधार बताते हुए कहा है कि खरीद प्रक्रिया नियमों के तहत और पारदर्शी तरीके से की गई। विभागीय स्तर पर अब इस रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई को लेकर मंथन जारी है।

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