जगदीप धनखड़ के इस्तीफे के बाद उपराष्ट्रपति पद के चुनाव में राजस्थान के जैसलमेर के जलालुद्दीन ने नामांकन किया, लेकिन दस्तावेजों में खामी के कारण उनका पर्चा खारिज हो गया।
देश के दूसरे सबसे बड़े संवैधानिक पद उपराष्ट्रपति के चुनाव को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के इस्तीफे के बाद यह पद खाली हो गया है और नए उपराष्ट्रपति के चयन के लिए चुनावी प्रक्रिया चल रही है। इस बीच राजस्थान के जैसलमेर से एक नाम भी सुर्खियों में आया है। मंगालिया मोहल्ले के निवासी जलालुद्दीन ने 11 अगस्त को उपराष्ट्रपति पद के लिए नामांकन दाखिल किया, लेकिन दस्तावेजों में खामी के कारण उनका नामांकन खारिज कर दिया गया।
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चुनाव आयोग के नियमों के अनुसार, उपराष्ट्रपति चुनाव में नामांकन के साथ ‘निर्वाचन नामावली की प्रमाणित प्रति’ की ताज़ा तारीख जरूरी है। जांच में पाया गया कि जलालुद्दीन द्वारा जमा की गई प्रति पुरानी थी, जिसके चलते उनका नामांकन अमान्य कर दिया गया। जलालुद्दीन पहले भी कई चुनाव लड़ चुके हैं, जिनमें 2009 में वार्ड पंच का चुनाव, 2013 में विधानसभा चुनाव और 2014 में लोकसभा चुनाव शामिल हैं, हालांकि उन्होंने बाद में दोनों पर्चे वापस ले लिए थे। वर्तमान में वे हरदेव जोशी पत्रकारिता विश्वविद्यालय में अध्ययनरत हैं।
इस उपराष्ट्रपति चुनाव में कुल सात उम्मीदवारों ने नामांकन किया था, जिनमें से केवल दिल्ली के जीवन कुमार मित्तल का पर्चा मान्य पाया गया। बाकी छह उम्मीदवारों के नामांकन दस्तावेजों की कमी के कारण खारिज हो गए। इन छह में जलालुद्दीन के साथ तमिलनाडु के डॉ. के. पद्मराजन, आंध्र प्रदेश के नैडुगारी राजशेखर और दिल्ली के डॉ. मंदाती तिरुपति रेड्डी शामिल हैं।
जलालुद्दीन ने कहा कि उन्हें पहले से अंदेशा था कि उनका नामांकन स्वीकार नहीं होगा, परंतु वे चुनावी प्रक्रिया में भाग लेना अपना शौक मानते हैं और इसे लोकतंत्र का हिस्सा बताते हैं। हालांकि उनका उपराष्ट्रपति पद का सपना इस बार पूरा नहीं हो सका, लेकिन उन्होंने जैसलमेर और राजस्थान का नाम चर्चा में जरूर लाया है। अब मुख्य राजनीतिक दलों बीजेपी और कांग्रेस के उम्मीदवारों की घोषणा का इंतजार है।