राजस्थान ग्रेड फोर्थ भर्ती परीक्षा
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राजस्थान में शुक्रवार से शुरू हुई ग्रेड फोर्थ (चपरासी) भर्ती परीक्षा ने सुरक्षा इंतजामों और सख्ती के मामले में एक नया कीर्तिमान बना दिया। प्रदेशभर में 21 सितंबर तक चलने वाली इस परीक्षा के पहले दिन अभ्यर्थियों को प्रवेश से पूर्व कड़ी जांच प्रक्रिया से गुजरना पड़ा।
परीक्षा सुबह 10 बजे से शुरू हुई, जबकि प्रवेश द्वार सुबह 8 बजे ही खोल दिए गए थे। सुबह 9 बजे के बाद किसी को भी अंदर जाने की अनुमति नहीं दी गई। इस दौरान कई अभ्यर्थी समय पर नहीं पहुंच सके और अधिकारियों से अंदर जाने की गुहार लगाते रहे, पर नियमों में कोई ढील नहीं दी गई।
सुरक्षा जांच इतनी कड़ी थी कि महिला अभ्यर्थियों को कानों में पहनी बालियां और गले के डोरे तक उतारने पड़े। हाथों में बंधे धागे भी काट दिए गए। यहां तक कि अंगूठियां और धातु की वस्तुएं भी हटवाई गईं। केवल एडमिट कार्ड और आवश्यक दस्तावेजों के साथ ही उम्मीदवारों को प्रवेश दिया गया।
परीक्षा में कुल 53 हजार 749 पदों के लिए करीब 24 लाख 75 हजार अभ्यर्थियों ने आवेदन किया है। इनमें 75 प्रतिशत अभ्यर्थी ऐसे हैं, जो ओवर-क्वालिफाइड माने जा रहे हैं। सरकारी नौकरी पाने की होड़ में बड़ी संख्या में उच्च शिक्षा प्राप्त उम्मीदवार भी चपरासी पद के लिए परीक्षा दे रहे हैं।
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राज्य के 38 जिलों में 1286 परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं। प्रत्येक पारी में लगभग 4 लाख 11 हजार 843 परीक्षार्थी शामिल हो रहे हैं। परीक्षा केंद्रों पर सुबह से ही लंबी कतारें लग गईं। सुरक्षा जांच की प्रक्रिया समय लेने वाली रही, जिससे कतारें लगातार बढ़ती चली गईं।
राजस्थान में हाल के वर्षों में हुई भर्ती परीक्षाओं में पेपर लीक और नकल की घटनाओं को देखते हुए इस बार सरकार ने बेहद सख्ती अपनाई है। प्रशासन का उद्देश्य न केवल परीक्षा को पारदर्शी और निष्पक्ष बनाना है, बल्कि उम्मीदवारों और समाज के बीच भरोसा कायम करना भी है।
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