राजस्थान के बजट को लेकर विपक्ष ने नाराजगी जाहिर की है। विपक्ष के नेता टीकाराम जूली ने सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप लगाते हुए कहा कि यह बजट किसानों और महिलाओं के हित में नहीं है।
किसानों से जुड़े वादे अधूरे
टीकाराम जूली के मुताबिक, किसानों से 12,000 रुपये की सम्मान निधि देने का वादा किया गया था, लेकिन केवल 9,000 रुपये ही दिए जा रहे हैं। इसके अलावा, 2,700 रुपये प्रति क्विंटल एमएसपी देने का वादा भी पूरा नहीं किया गया। सरकार ने हरियाणा के समान पेट्रोल-डीजल के दाम किसानों को देने की घोषणा की थी, लेकिन वह भी लागू नहीं हुई। बाजरा खरीदने का वादा भी अब तक अधूरा है।
गांवों में बिजली संकट
विपक्ष का आरोप है कि गांवों में बिजली कटौती हो रही है, जिससे किसानों के साथ-साथ छात्रों को भी परेशानी हो रही है।
महिलाओं और युवाओं के लिए वादे भी अधूरे
महिलाओं के प्रति अपराध बढ़ने का भी विपक्ष ने मुद्दा उठाया। इसके अलावा, "लखपति दीदी" योजना पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। युवाओं के लिए बजट में 1.25 लाख नौकरियों की घोषणा की गई है, लेकिन विपक्ष का कहना है कि इससे पहले की घोषणाओं पर भी अभी तक भर्तियां पूरी नहीं हुई हैं। निजी क्षेत्र में रोजगार देने का वादा भी अधूरा है।
राजकोषीय घाटे पर चिंता
विपक्ष का कहना है कि राज्य का राजकोषीय घाटा लगातार बढ़ रहा है, और हर नागरिक पर एक लाख रुपये का कर्ज हो गया है। सरकार खुद मान रही है कि अब तक केवल 73% वादे पूरे हुए हैं। टीकाराम जूली ने यह भी कहा कि गुरुवार को विधानसभा में फोन टैपिंग के मुद्दे पर चर्चा होगी। अगर सरकार संतोषजनक जवाब नहीं देती, तो विपक्ष आगे की रणनीति तय करेगा।
क्या बोले मदन दिलावर
बजट को लेकर विपक्ष ने सरकार पर तीखे हमले किए हैं। नेता प्रतिपक्ष टेकाराम जूली ने सरकार पर कई आरोप लगाए, जिनका जवाब शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने दिया। उन्होंने कहा कि विपक्ष बिना विजन के सरकार की आलोचना कर रहा है। उन्होंने दावा किया कि बजट धरातल पर उतर रहा है और इसके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए मुख्यमंत्री भजनलाल ने सभी प्रभारी मंत्रियों को अपने-अपने क्षेत्रों में भेजा है, ताकि घोषणाओं को साकार किया जा सके।
शिक्षा मंत्री ने बताया कि मुख्यमंत्री भजनलाल ने बजट कार्यों की समीक्षा की और 90 प्रतिशत से अधिक योजनाओं पर कार्य शुरू हो चुका है। उन्होंने बजट को बेहद प्रभावी बताते हुए कहा कि उनके विभाग, शिक्षा और पंचायती राज, को भी पर्याप्त संसाधन मिले हैं।
सरकार की योजनाओं के तहत जिन गांवों में पंचायत भवन नहीं हैं, वहां नए पंचायत भवन बनाए जाएंगे। ग्रामीण सफाई व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए बर्तन भंडार स्थापित किए जाएंगे। इसके अलावा, पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए गांवों में 10 करोड़ पौधे लगाए जाएंगे। उच्च शिक्षा को सशक्त बनाने के लिए कॉलेजों में नए विभाग खोले जाएंगे और घुमंतू परिवारों को पट्टे दिए जाएंगे।