राजस्थान हाईकोर्ट ने सीकर के चर्चित ऑनर किलिंग मामले में सभी आरोपियों की जमानत याचिका खारिज कर दी है। अदालत ने स्पष्ट किया कि यह मामला डेथ रेफरेंस से जुड़ा है, इसलिए इस स्थिति में आरोपियों को जमानत राहत नहीं दी जा सकती।
अधिवक्ता राजेंद्र कुमार हुड्डा के अनुसार, निचली अदालत से सजा मिलने के बाद से ही सभी आरोपी जेल में बंद हैं और उनके वकील ने जयपुर हाईकोर्ट में जमानत के लिए अर्जी लगाई थी।
पहले निर्दयता से पिटाई भी की
यह आपराधिक मामला सीकर के रानोली थाना क्षेत्र का है, जो वर्ष 2019 में घटित हुआ था। 21 अक्तूबर, 2019 की रात 19 वर्षीय युवती प्रेम अपने 37 वर्षीय प्रेमी गणपत से बातचीत कर रही थी। उसी दौरान युवती के पिता रामगोपाल ने दोनों को बातचीत करते पकड़ लिया। इसके बाद रामगोपाल और उसके रिश्तेदारों ने मिलकर युवती के साथ भीषण मारपीट की। आरोपियों ने साजिशन तरीके से प्रेमी गणपत को पेट्रोल पंप पर बुलवाया और उसका अपहरण कर लिया। आरोपियों ने गणपत को निर्दयता से पीटा। गंभीर चोटों के कारण प्रेम और गणपत दोनों की मौत हो गई। इसके बाद आरोपियों ने साक्ष्य छुपाने की नीयत से दोनों के शवों को पहाड़ियों में ले जाकर फेंक दिया।
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फोन कॉल से खुला था राज
दोहरे हत्याकांड को अंजाम देने के बाद आरोपी पिता रामगोपाल ने अपनी बेटी के लापता होने की गुमराह करने वाली रिपोर्ट थाने में दर्ज करवा दी। दूसरी तरफ, जब गणपत अपने घर वापस नहीं लौटा, तो उसके परिजनों ने उसकी तलाश शुरू की। गणपत के परिजनों ने उसके दोस्त से पूछताछ की, तो दोस्त ने बताया कि 21 अक्तूबर की रात गणपत का फोन आया था और कॉल के दौरान झगड़े और मारपीट की आवाजें आ रही थीं। इस सुराग के आधार पर गणपत के परिवार ने तुरंत रानोली थाने में मामला दर्ज कराया। पुलिस ने आरोपी पिता और उसके सहयोगियों को गिरफ्तार कर अदालत में पेश किया।
अदालत ने माना राक्षसी कृत्य
मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने पर्याप्त गवाह और साक्ष्य अदालत के सामने प्रस्तुत किए। दो साल पहले अदालत ने इस जघन्य हत्याकांड को क्रूर, बर्बर और राक्षसी मानते हुए 'रेयर ऑफ द रेयरेस्ट' श्रेणी में रखा था। अदालत ने मुख्य आरोपी पिता रामगोपाल को मौत की सजा और एक लाख रुपये के जुर्माने से दंडित किया था। साथ ही, चाचा महादेव, मामा परसराम, चचेरे भाई महेंद्र, नंदलाल, बीरबल, सोहनलाल, मदनलाल, संदीप और बाबूलाल सहित 10 आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। मामले में एक अन्य आरोपी राजेश को तीन साल की जेल की सजा मिली थी, जबकि तीन अन्य आरोपियों को बरी कर दिया गया था। सजा सुनाए जाने के बाद से ही सभी आरोपी जेल में बंद हैं। अब हाईकोर्ट से भी जमानत याचिका खारिज हो जाने के बाद आरोपियों को कोई राहत नहीं मिल सकी है।