कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सचिन पायलट
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जयपुर में कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव एवं पूर्व उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट ने प्रदेश की भाजपा सरकार द्वारा विधानसभा में प्रस्तुत बजट को निराशाजनक करार दिया है। उन्होंने इसे प्रदेश की जनता पर डबल इंजन की सरकार का दोहरा कुठाराघात बताया। पायलट ने कहा कि पहले केंद्रीय बजट में राजस्थान की अनदेखी की गई और अब राज्य सरकार के बजट ने किसानों, युवाओं, महिलाओं और मध्यम वर्ग की अपेक्षाओं को पूरा नहीं किया।
स्कूल मरम्मत बजट पर उठाए सवाल
पायलट ने झालावाड़ की एक स्कूल में हुए हादसे का उल्लेख करते हुए कहा कि इस मामले में राजस्थान हाईकोर्ट ने सरकार को कड़ी फटकार लगाई थी। उन्होंने कहा कि सरकार ने हलफनामे में स्वीकार किया था कि प्रदेश की स्कूलों की मरम्मत के लिए 21 हजार करोड़ रुपये की आवश्यकता है, लेकिन राज्य बजट में केवल 550 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। उनके अनुसार यह प्रावधान विद्यार्थियों की सुरक्षा के प्रति गंभीरता की कमी दर्शाता है और इससे बच्चों के भविष्य पर असर पड़ेगा।
वित्तीय प्रबंधन और कर्ज पर चिंता
राज्य की आर्थिक स्थिति पर सवाल उठाते हुए पायलट ने कहा कि वित्तीय कुप्रबंधन के कारण राजस्व घाटा बढ़ा है और सरकार को कर्ज लेना पड़ेगा, जिससे महंगाई बढ़ने की आशंका है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने शब्दों के माध्यम से अपनी दो वर्षों की नाकामी को छिपाने का प्रयास किया है। उनके अनुसार पिछले वर्षों की तरह यह बजट भी धरातल पर उतरता हुआ नहीं दिखता।
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घोषणाओं और रोजगार के मुद्दे पर निशाना
पायलट ने हाई टेक सिटी, आईटी सिटी और एयरो सिटी जैसी घोषणाओं का जिक्र करते हुए कहा कि ये परियोजनाएं कागजों तक सीमित हैं। उन्होंने कहा कि सरकार अपने पिछले बजटों की उपलब्धियों पर मौन है। प्रदेश में बेरोजगारी की स्थिति पर चिंता जताते हुए उन्होंने चार लाख नौकरियों के वादे और निजी क्षेत्र के रोजगार आंकड़ों को सार्वजनिक न करने को सरकार की विफलता बताया।
किसानों, सामाजिक सुरक्षा और पर्यावरण पर प्रश्न
किसानों और गरीबों के मुद्दों पर पायलट ने कहा कि नहरी क्षेत्रों में फार्म पॉन्ड की सब्सिडी दो वर्षों से बंद है। सामाजिक सुरक्षा पेंशन में बढ़ोतरी न होने को उन्होंने गरीब जनता के साथ अन्याय बताया। औद्योगिक और पर्यावरणीय दृष्टि से बजट में दूरदर्शिता की कमी का उल्लेख करते हुए उन्होंने टेक्सटाइल उद्योग पर अमेरिकी टैरिफ के संभावित प्रभाव और सोलर पार्कों के नाम पर राज्यवृक्ष खेजड़ी के संरक्षण के मुद्दे पर ठोस नीति के अभाव की बात कही। उन्होंने यह भी कहा कि राइजिंग राजस्थान के निवेश और जल जीवन मिशन के लिए केंद्र से फंड न मिलने जैसे मुद्दों पर पारदर्शिता आवश्यक है।