आज विधानसभा के बजट सत्र से पहले राज्यपाल हरिभाऊ वागड़े ने छह विधेयक सरकार को वापस लौटा दिए हैं, जिनमें से पांच पिछली सरकार के समय पारित हुए थे, वहीं एक विधेयक वसुंधरा राजे के पहले कार्यकाल के समय पारित हुआ था। अब विधानसभा सत्र में सरकार इन्हें वापस लेने का प्रस्ताव रख सकती है।
मौजूदा सत्र में सरकार धर्म स्वातंत्र्यता वाला बिल पेश करने की तैयारी में है।
इसके अलावा कोचिंग संस्थानों में अत्महत्या रोकने सहित बीकानेर व भरतपुर में विकास प्राधिकरणों के गठन के विधेयकों को सदन में चर्चा के लिए रखा जा सकता है।
राज्यपाल ने पिछली कांग्रेस सरकार के समय पारित पांच विधेयक सरकार को लौटाए हैं, इनमें तीन विधेयक केन्द्र सरकार द्वारा 2020 में लाए गए कृषि कानूनों के स्थान पर तत्कालीन राज्य सरकार द्वारा लाए गए थे। चूंकि केन्द्र सरकार स्वयं अपने कृषि कानून वापस ले चुकी है, ऐसे में अब इन विधेयकों का भी कोई अर्थ नहीं रह गया है।
इसके साथ ही एक विधेयक लिचिंग के मामलों से भी जुड़ा है। पिछली सरकार के समय लिचिंग की घटनाओं पर रोक के लिए यह विधेयक लाया गया था। भाजपा ने विपक्ष में रहते हुए इसका विरोध किया था। अब चूंकि राज्यपाल ने इसे लौटा दिया है, इसलिए सरकार इसे वापस ले सकती है। इसके अलावा एक विधेयक विद्युत शुल्क से संबंधित है जो पिछली सरकार के कार्यकाल के अंतिम समय में लाया गया था। इसे भी वापस लिए जाने की संभावना है।
इन पांच के अलावा धर्म स्वातंत्र्य विधेयक भी राज्यपाल ने लौटाया है। यह विधेयक 2008 में पारित हुआ था और धर्म परिवर्तन की घटनाओं को रोकने के लिए लाया गया था। अब सरकार इसके स्थान पर नया विधेयक लेकर आ रही है, जो इसी सत्र में सदन में चर्चा के लिए रखा जाएगा।
पुराने विधेयकों के साथ ही सदन में इस बार कुछ नए विधेयक भी लाए जाएंगे। इनमें बीकानेर और भरतपुर में विकास प्राधिकरणों के गठन से जुडे विधेयक शामिल हैं। सरकार ने इनके अधिनियम जारी किए थे, अब अधिनियम के स्थान पर इनका बिल लाया जाएगा। इसके साथ ही कोचिंग संस्थाओं पर नियंत्रण के लिए भी विधेयक आ सकता है। इस बारे में खुद सरकार ने हाईकोर्ट को सूचित किया है और बताया है कि सरकार ये बिल लाने जा रही है। बिल का प्रारूप दो साल से तैयार है।
राज्यपाल ने लौटाए हैं ये विधेयक
राजस्थान विद्युत शुल्क विधेयक 2023
विद्युत उपभोग पर शुल्क लगाने सम्बन्ध में विधेयक लाया गया था। दो अगस्त 2023 को पारित किया गया था
आवश्यक वस्तु (विशेष उपबंध एवं राजस्थान संशोधन विधेयक) 2020
केन्द्र सरकार द्वारा लाए गए आवश्यक वस्तु विधेयक के स्थान पर यह लाया गया था। दो नवम्बर 2020 को पारित किया गया था।
कृषक सशक्तिकरण एवं संरक्षण (कीमत आश्वासन और कृषि सेवा पर करार राजस्थान संशोधन) विधेयक 2020
केन्द्र सरकार द्वारा लाए गए बिल के स्थान पर लाया गया था और दो नवंबर 2020 को पारित किया गया था।
कृषक उपज व्यापार एवं वाणिज्य (संवर्धन और सरलीकरण राजस्थान संशोधन) विधेयक 2020
केन्द्र सरकार द्वारा लाए गए बिल के स्थान पर लाया गया था और दो नवंबर 2020 को पारित किया गया था।
राजस्थान लिचिंग से संरक्षण विधेयक 2019
लिचिंग की घटनाओं को रोकने के लिए विधेयक लाया गया था, जो पांच अगस्त 2019 को पारित हुआ था।
राजस्थान धर्म स्वातंत्र्य विधेयक 2008
वसुंधरा राजे के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार के समय धर्म परिवर्तन की घटनाओं को रोकने के लिए लाया गया था। पारित कर भेजा गया लेकिन राष्ट्रपति की मंजूरी नहीं मिल पाई और अब वापस लिया जा रहा है।