पाकिस्तान से सटे भारत के राज्य
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हाल ही के मामले
18 जनवरी को बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स ने बाड़मेर से लगी पाकिस्तान सीमा पर हथियारों का जखीरा पकड़ा था। हथियारों को फेंसिंग के पास के खेतों में रेत के नीचे दबाया गया था। यहां से नौ एमएम ग्लॉक पिस्टर, आठ मैगजीन और 78 जिंदा कारतूस मिले थे। ये खेत भभूणी की ढाणी में सीमा पर है। 26 जनवरी के मद्देनजर एजेंसियों ने यहां सतर्कता बढ़ाई और गांवों में तलाशी अभियान तेज किया हुआ है। बीएसएफ के सूत्रों के अनुसार, इस घटना के बाद पाकिस्तान रेंजर के साथ एक मीटिंग भी हुई है। इसमें बीएसएफ ने अपनी आपत्ति दर्ज की है।
इसी तरह की दूसरी घटना जनवरी के दूसरे हफ्ते में श्रीगंगानगर जिले के अनूपगढ़ सेक्टर के गांव 18पी में हुई थी। यहां पर भी हथियार मिले थे। यहां ड्रोन के जरिए दो ऑटोमैटिक पिस्टल गिराए गए थे। वहीं, दिसंबर में श्रीगंगानगर के श्रीकरणपुर इलाके में दो पिस्टल, दो मैगजीन और सात कारतूस पाकिस्तान से आए थे, जिसे बीएसएफ ने बरामद कर लिया था।
कैसे होती है तस्करी?
जानकारों के अनुसार, अगर ताजा ट्रेंड देखे तो पाकिस्तान कश्मीर घाटी का उपयोग आतंकी भेजने के लिए करता है। वहीं, साल 2018 के बाद से ड्रोन का इस्तेमाल पंजाब सीमा पर बढ़ाया है। इसके जरिए पाकिस्तान ड्रग्स और हथियार दोनों दोनों भेज रहा है। बीएसएफ की रिपोर्ट के अनुसार, बीएसएफ ने साल 2020 में भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा पर करीब 79 ड्रोन उड़ानों का पता लगाया था। इसके बाद 2021 में ये संख्या 109 से ज्यादा पहुंच गई और 2022 में 215 तक आंकड़ा पहुंच गया था। इसके बाद से लगातार मामले बढ़ते जा रहे हैं। साल 2023 में 110 और 2024 में 260 से ज्यादा केस दर्ज किए हैं, जिसमें ड्रोन का इ्स्तेमाल करते हुए तस्करी किया गया। बीएसएफ ने ड्रोन को गिराया भी है, इनकी संख्या भी बहुत ज्यादा है।
भारत-पाकिस्तान सीमा लंबाई
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मौसम का कैसे फायदा उठाते हैं तस्कर
राजस्थान के सरहदी जिलों में कड़ाके की सर्दी, भीषण गर्मी और बारिश के मौसम में भी बीएसएफ एवं विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों के जवान मुश्तैदी से ड्यूटी दे रहे हैं। सरहद की निगेहबानी करने वाले जवानों को मौसम के प्रभाव से तारबंदी के नीचे से रेत सरकने के कारण काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। भीषण गर्मी में करीब 48 से 50 डिग्री तापमान में लू के थपेड़ों एवं कड़ाके की सर्दी में अत्यधिक न्यूनतम तापमान के बीच चलने वाली नस्तर सी चुभन वाली शीतलहर में भी सरहद की पल-पल की गतिविधियों पर नजरें लगाए रखना जवानों के लिए जान जाोखिम में डालने से कम नहीं है। चूंकि राजस्थान में हर साल लू और शीतलहर दोनों ही के प्रभाव से बड़ी संख्या में लोगों की जान जाती हैं। आमतौर पर अकाल की चपेट में रहने वाले बाड़मेर एवं जैसलमेर के सरहदी इलाकों में एकाध बार तेज बारिश से बाढ़ के हालात भी बन चुके हैं। ऐसे में सर्दी एवं गर्मी के साथ ही कभी-कभार बाढ़ एवं अतिवृष्टि से भी जवानों को दो चार होना पड़ता है।
पंजाब में सख्ती के बाद अवांछित गतिविधियों के लिए राजस्थान सरहद पर पाक का फोकस
भौगोलिक दृष्टि एवं सुरक्षा साधनों की उपलब्धता की दृष्टि से पिछले वर्षों में पाकिस्तान से लगती भारत के पंजाब राज्य की सीमा, राजस्थान सीमा से ज्यादा सुरक्षित मानी जाती है। ऐसे में पंजाब की सरहद की बजाय ज्यादातार राजस्थान के रेतीले इलाकों के बॉर्डर एवं गुजरात के समुद्री बॉर्डर पर पाकिस्तान अवांछित गतिविधियों को अंजाम देने के लिए ज्यादा फोकस कर रहा है। ऐसे में खासकर राजस्थान के बॉर्डर की सुरक्षा में समय-समय पर बढ़ोत्तरी की जाती है। मौजूदा समय में इसी कड़ी में जैसलमेर इलाके में ऑपरेशन सरहद हवा चलाया जा रहा है। इसके तहत सरहद पर बीएसएफ जवानों की पेट्रोलिंग एवं निगेहबानी बढ़ा दी गई है। गणतंत्र दिवस नजदीक होने से भी सुरक्षा इंतजाम बढ़ाए गए हैं।
राजस्थान में क्यों बढ़ रही तस्करी?
पहले हथियार और ड्रग्स तस्करी पंजाब के रास्ते होती थी। लेकिन सुरक्षा एजेंसियों की सख्ती के चलते अब तस्करों ने राजस्थान को नया अड्डा बना लिया है। इसमें बड़ी बात यह है कि राजस्थान में बॉर्डर रहने वाले लोगों के पाकिस्तान में रिश्तेदार हैं और यहां का बॉर्डर भी काफी बड़ा है, जिससे आवाजाही में आसानी रहती है। इसलिए बीएसएफ के साथ पुलिस ज्वाइंट ऑपरेशन चल रही है। इसी महीने भारत-पाक सीमा पर बीएसएफ को हथियारों का जखीरा मिला था। इसमें चार नौ एमएम ग्लॉक पिस्टल, आठ मैगजीन और 78 जिंदा कारतूस शामिल हैं।
बाड़मेर में कुछ दिनों पहले हथियारों की खेप मिली थी। पुलिस और बीसएफ मिलकर समय-समय पर ज्वाइंट ऑपरेशन चलते हैं। मैं खुद भी बॉर्डर पर जा रहा हूं। यहां उन लोंगों से पूछताछ की जा रही है, जो पिछले 15-20 साल से यहां रह रहे हैं और नारकोटिक्स के मामले में संदिग्ध हैं।
नरेंद्र मीणा, एसपी बाड़मेर