रक्षामंत्री राजनाथसिंह एवं वसुंधरा राजे
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मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ समेत राजस्थान में बड़े अंतर से जीत दर्ज करा चुकी भाजपा ने मुख्यमंत्री के नाम की घोषणा से पूर्व पर्यवेक्षकों के दल तीनों राज्यों में भेजे हैं। जो 10 दिसंबर को विधायक दल की बैठक के बाद CM Face पर चर्चा करेंगे। रक्षामंत्री राजनाथसिंह को पर्यवेक्षक दल में शामिल करने के पीछे आलाकमान की क्या सोच रही, ये एक विचारणीय तथ्य है।
राजस्थान भेजे गए तीनों पर्यवेक्षकों में रक्षामंत्री राजनाथसिंह का नाम विशेष तौर पर सोचनीय है। माना जा रहा है कि राजनाथसिंह राजनीति के खेल में पुराने खिलाड़ी हैं और जातीय समीकरणों को साधने में माहिर हैं। साथ ही यहाँ के कद्दावर नेताओं के बीच सम्माननीय चेहरा हैं। जानकार यह भी मानते हैं कि राजस्थान की राजनीति में राजनाथ की गहरी पकड़ है।
माना जा रहा है कि वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए राजनाथ ही हैं जो किसी भी प्रकार के गतिरोध को अपने अनुभव से साध सकते हैं। ज्ञात रहे कि पर्यवेक्षक दल में शामिल राजनाथ सबसे वरिष्ठ हैं जबकि सरोज पांडे और विनोद तावड़े क्रमश: छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र के बड़े नेता माने जाते हैं।
सियासी जानकारों का मानना है कि राजस्थान की राजनीति में राजनाथसिंह की पकड़ काफी मजबूत है और मुख्यमंत्री पद की दौड़ में शामिल सभी दावेदारों के साथ उनके मधुर संबंध हैं। विधानसभा चुनाव का प्रचार करने राजस्थान आए राजनाथ ने तब भी वसुंधरा राजे के कार्यकाल की जमकर तारीफ की थी।
वैसे भी राजनाथ भाजपा का सबसे सौम्य चेहरा माने जाते हैं और भाजपा अध्यक्ष पद के कार्यकाल के दौरान वसुंधरा को साधने सफल रहे थे। इसलिए किसी भी अनपेक्षित गतिरोध को दूर करने में वे तुरुप का पत्ता साबित हो सकते हैं।