जयपुर में राजलक्ष्मी महिला अर्बन को-ऑपरेटिव बैंक से जुड़े करोड़ों रुपये के कथित लोन घोटाले में पुलिस ने आठ साल बाद दो फरार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक, फर्जी दस्तावेजों और विवादित संपत्तियों के आधार पर बैंक से लोन स्वीकृत कराने के मामले में दोनों आरोपी लंबे समय से फरार चल रहे थे। विशेष टीम ने तकनीकी निगरानी और मुखबिर तंत्र की मदद से दोनों को गिरफ्तार किया।
फर्जी दस्तावेजों से 13 ऋण खाते स्वीकृत कराने का आरोप
पुलिस उपायुक्त जयपुर उत्तर करण शर्मा ने बताया कि वर्ष 2018 में माणकचौक थाने में राजलक्ष्मी महिला अर्बन को-ऑपरेटिव बैंक लिमिटेड, जयपुर से संबंधित गंभीर आपराधिक मामला दर्ज किया गया था। आरोप है कि बैंक के पूर्व अध्यक्ष डॉ. घनश्याम चौधरी, तत्कालीन पदाधिकारियों, कर्मचारियों और अन्य लोगों ने आपराधिक साजिश के तहत फर्जी दस्तावेजों के आधार पर विवादित और फर्जी संपत्तियों पर मॉर्गेज लोन स्वीकृत करवाकर करोड़ों रुपये की राशि हड़प ली।
प्रकरण में 59 नामजद आरोपियों के खिलाफ जांच शुरू हुई थी। आरोपियों ने फर्जी सोसायटियों के पट्टे और विवादित या फर्जी संपत्तियों के दस्तावेज बैंक में गिरवी रखकर नियमों के विरुद्ध कुल 13 ऋण खाते स्वीकृत करवाए। इससे बैंक को भारी आर्थिक नुकसान होने का आरोप है।
सहकारी समिति की जांच में सामने आई धोखाधड़ी
सहकारी समिति की जांच में कथित धोखाधड़ी सामने आने के बाद बैंक के अधिकृत ऋण प्रभारी सादत अली ने पुलिस थाने में रिपोर्ट दी थी। इसके आधार पर भारतीय दंड संहिता की धारा 420, 467, 468, 471 और 120बी सहित अन्य धाराओं में मामला दर्ज किया गया।
आठ साल से गिरफ्तारी से बच रहे थे आरोपी
वांछित आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए थाना प्रभारी राकेश ख्यालिया के नेतृत्व में विशेष टीम गठित की गई। टीम ने तकनीकी सूचना और मुखबिर तंत्र की मदद से आरोपियों के संभावित ठिकानों की पहचान की।
पुलिस के अनुसार, दोनों आरोपी लंबे समय से कानून की पहुंच से दूर रहने के लिए लगातार अपना निवास और ठिकाना बदल रहे थे। पुलिस टीम ने सादी वर्दी में निगरानी रखते हुए उनकी गतिविधियों पर नजर रखी। सटीक सूचना मिलने के बाद संभावित ठिकानों पर दबिश देकर दोनों को गिरफ्तार कर लिया गया।
मनोहरलाल और निशा भारद्वाज गिरफ्तार
पुलिस ने गिरफ्तार आरोपियों की पहचान मनोहरलाल और निशा भारद्वाज के रूप में की है। दोनों पर 10-10 हजार रुपये का इनाम घोषित था। पुलिस के मुताबिक, दोनों लंबे समय से फरार चल रहे थे। उनकी गिरफ्तारी के बाद अब मामले की जांच को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी।
अन्य संदिग्धों और लेनदेन की जांच तेज
पुलिस के अनुसार, इस कार्रवाई में तकनीकी अनुसंधान, धरातलीय मुखबिरी, सादी वर्दी में निगरानी और त्वरित दबिश का समन्वय किया गया। अधिकारियों का कहना है कि दोनों फरार आरोपियों की गिरफ्तारी से मामले में शामिल अन्य संदिग्धों और वित्तीय लेनदेन से जुड़े तथ्यों की जांच को गति मिलेगी।