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राजस्थान: आरएएस अधिकारी पंकज ओझा को भड़काऊ सोशल मीडिया पोस्ट मामले में चार्जशीट, 15 दिन में मांगा जवाब

Fri, 30 Oct 2026 11:10 AM IST
आशुतोष प्रताप सिंह न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर

सार

राजस्थान सरकार ने वरिष्ठ आरएएस अधिकारी पंकज ओझा को सोशल मीडिया पर कथित तौर पर भड़काऊ, जातीय और सांप्रदायिक पोस्ट साझा करने के मामले में चार्जशीट थमाई है। कार्मिक विभाग ने उन पर सरकार की छवि धूमिल करने और सेवा नियमों का उल्लंघन करने का आरोप लगाते हुए 15 दिन में जवाब मांगा है।
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आरएएस अधिकारी पंकज ओझा - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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राजस्थान सरकार ने वरिष्ठ आरएएस अधिकारी पंकज ओझा के खिलाफ सोशल मीडिया पर कथित तौर पर भड़काऊ, जातीय और सांप्रदायिक पोस्ट साझा करने के मामले में कार्रवाई की है। कार्मिक विभाग ने उन्हें चार्जशीट थमाते हुए 15 दिन के भीतर जवाब देने के निर्देश दिए हैं। विभाग ने आरोप लगाया है कि उनकी पोस्ट से सरकार की छवि धूमिल हुई है। तय समय में जवाब नहीं देने पर एकतरफा कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है। साथ ही अधिकारी को इस मामले में किसी तरह की राजनीतिक या प्रशासनिक सिफारिश नहीं कराने के लिए पाबंद किया गया है। हालांकि, पंकज ओझा ने सभी आरोपों को खारिज करते हुए इसे अपने खिलाफ साजिश बताया है।

फेसबुक पर भड़काऊ पोस्ट साझा करने का आरोप

कार्मिक विभाग की ओर से जारी चार्जशीट के अनुसार, गोपालन निदेशक के पद पर तैनाती के दौरान पंकज ओझा ने अपनी फेसबुक आईडी से वर्ष 2025 में 16, 19, 21 और 22 से 25 अक्तूबर के बीच कई आपत्तिजनक पोस्ट किए। इसके अलावा 27 अक्तूबर को भी पोस्ट साझा किए गए। आरोप है कि उन्होंने सार्वजनिक मंच पर ऐसी टिप्पणियां लिखीं और सामग्री साझा की, जिनसे सामाजिक और सांप्रदायिक सौहार्द बिगड़ सकता था।

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विभाग ने इन गतिविधियों को राजस्थान सिविल सेवाएं (आचरण) नियम, 1971 के नियम 3, 4 और 11 का उल्लंघन माना है। इन नियमों के तहत सरकारी कर्मचारियों से अनुशासित आचरण, कर्तव्यनिष्ठा और अपने पद की गरिमा बनाए रखने की अपेक्षा की जाती है। चार्जशीट में कहा गया है कि सरकार की नीतियों की सार्वजनिक आलोचना और गैरजिम्मेदाराना बयानबाजी करके अधिकारी ने गंभीर कदाचार किया है।

जातिगत जनगणना और करदाताओं से जुड़ी पोस्ट का भी जिक्र

चार्जशीट में 25 अक्तूबर 2025 को किए गए एक पोस्ट का विशेष रूप से उल्लेख किया गया है। इसमें पंकज ओझा ने केंद्र सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हुए लिखा था कि केवल जातिगत जनगणना ही क्यों होनी चाहिए, जातिगत करदाताओं और जातिगत अपराध के आंकड़े भी सार्वजनिक किए जाने चाहिए, ताकि पता चल सके कि किसका कितना योगदान है।

विभाग ने इस टिप्पणी को सेवा मर्यादा के खिलाफ और सरकारी नीतियों की अनुचित आलोचना माना है। कार्मिक विभाग के अनुसार, शिकायतें मिलने के बाद अधिकारी को 19 जनवरी 2026 को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था। इसमें तीन दिन के भीतर जवाब मांगा गया था, लेकिन विभाग का दावा है कि तय समय में उन्हें कोई स्पष्टीकरण नहीं मिला। चार्जशीट में यह आरोप भी लगाया गया है कि उनके फेसबुक पेज से प्रधानमंत्री, विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्रियों और पूर्व मुख्यमंत्रियों के खिलाफ अभद्र और अपमानजनक भाषा वाले फोटो व टिप्पणियां साझा की गईं।

पंकज ओझा ने आरोपों को बताया साजिश

दूसरी ओर, वरिष्ठ आरएएस अधिकारी पंकज ओझा ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को पूरी तरह खारिज किया है। उनका कहना है कि उन्होंने इस तरह की कोई विवादास्पद या आपत्तिजनक पोस्ट साझा नहीं की। ओझा के मुताबिक, कुछ असामाजिक तत्वों ने उनके नाम से फर्जी स्क्रीनशॉट तैयार कर सोशल मीडिया पर प्रसारित किए हैं। उनका दावा है कि वह खुद इस षड्यंत्र के पीड़ित हैं। ओझा ने बताया कि खाद्य सुरक्षा विभाग में तैनाती के दौरान उन्होंने नकली उत्पाद बनाने वालों और मिलावटखोरों के खिलाफ सख्त अभियान चलाया था। इसी दौरान एक विशेष लॉबी उनके विरोध में सक्रिय हो गई। उनका आरोप है कि वही लॉबी लगातार उनके खिलाफ झूठी और गुमनाम शिकायतें भेजकर उन्हें परेशान कर रही है।

पुलिस में शिकायत और अशोक नगर थाने में परिवाद दर्ज

पंकज ओझा के अनुसार, उन्होंने 29 दिसंबर 2025 को ही कार्मिक सचिव और मुख्य सचिव को पत्र लिखकर अपने खिलाफ चल रही कथित साजिश की जानकारी दे दी थी। उन्होंने जयपुर पुलिस आयुक्त से व्यक्तिगत रूप से मुलाकात कर भी शिकायत की थी। इसके बाद अशोक नगर थाने में परिवाद दर्ज किया गया और पुलिस फिलहाल मामले की जांच कर रही है।

राजकाज पोर्टल पर जवाब देने का अधिकारी ने किया दावा

कार्मिक विभाग की ओर से 19 जनवरी को जारी कारण बताओ नोटिस को लेकर पंकज ओझा का कहना है कि उन्होंने 27 जनवरी को ही राज्य सरकार के अधिकृत पोर्टल 'राजकाज' के माध्यम से अपना विस्तृत जवाब प्रस्तुत कर दिया था। उनके पास इस डिजिटल जवाब की प्राप्ति रसीद भी मौजूद है।

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ओझा के मुताबिक, उन्होंने अपने जवाब में स्पष्ट किया था कि मामला उनके नाम से प्रसारित किए गए फर्जी सोशल मीडिया पोस्ट से जुड़ा है और इस संबंध में वह पहले ही पुलिस में शिकायत दर्ज करा चुके हैं। ऐसे में अब चार्जशीट जारी होने के बाद विभागीय कार्रवाई और अधिकारी की ओर से दिए गए जवाब को लेकर मामला चर्चा में है।

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