राजस्थान में क्रिकेट संबंधी गतिविधियों के संचालन के लिए गठित राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन के अध्यक्ष पद के लिए भाजपा नेता राजेंद्र राठौर के बेटे पराक्रम राठौर पद की दौड़ में शामिल होते नजर आ रहे हैं। पिछली सरकार में अशोक गहलोत के बेटे वैभव गहलोत इस पद पर काबिज रहे लेकिन अब सत्ता बदलते ही पराक्रम राठौर ने ताल ठोंक दी है। पराक्रम चूरू से क्रिकेट संघ के जिला अध्यक्ष चुने जाकर आरसीए के अध्यक्ष पद की दौड़ में शामिल हुए हैं।
आरसीए के अध्यक्ष पद पर काबिज होने की लड़ाई सामान्य नहीं है। दरअसल इस पद पर वर्षों से मुख्यमंत्री के नजदीकी ही बैठते आए हैं। वसुंधरा राजे के मुख्यमंत्रित्व काल में ललित मोदी आरसीए के अध्यक्ष रहे और 2008 में आईपीएल की शुरुआत की, बहुचर्चित आईपीएल के ग्लैमर से सब लोग अच्छी तरह से वाकिफ हैं। ललित मोदी वसुंधरा राजे के इतने करीबी थे कि उनकी शिकायत करना या उन्हें सुझाव देना किसी के बस की बात नहीं थी। मोदी के बाद जब विधानसभा अध्यक्ष सीपी जोशी आरसीए के अध्यक्ष बने तो भी हाल वही रहा। जोशी के बाद जब वैभव गहलोत अध्यक्ष बने तो उनसे भी कुछ कहने की हिम्मत किसी में नहीं थी। इस सबसे आगे आरसीए का इतिहास रहा है कि आरसीए अध्यक्ष और सरकार के खेल मंत्री की आपस में कभी नहीं बनी।
अब देखना यह है कि सरकार के नए खेल मंत्री कर्नल राज्यवर्धन सिंह राठौर जो कि नियमित रूप से खेलों और खिलाड़ियों को आग लाने की बात कर रहे हैं, पराक्रम के आरसीए के अध्यक्ष बनने के बाद इतनी पकड़ रख पाएंगे या एक बार फिर राजस्थान में खेल क्रीड़ा परिषद, आरसीए और खेल मंत्री के बीच ही उलझकर रह जाएंगे।