सार
विधानसभा में राजस्व अनुदान मांगों पर चर्चा के दौरान विधायक रविंद्र सिंह भाटी ने ओरण और गोचर भूमि के संरक्षण का मुद्दा उठाया। उन्होंने लैंड अलॉटमेंट रोकने हेतु विशेष नीति, सोलर परियोजनाओं पर स्पष्ट रुख और खेजड़ी बचाने के लिए बिल लाने की मांग की।
विधानसभा में राजस्व विभाग की अनुदान मांगों पर चर्चा के दौरान विधायक रविंद्र सिंह भाटी ने सरकार को घेरते हुए भूमि आवंटन और ओरण भूमि के संरक्षण का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि यदि प्रदेश में सबसे बड़ा लैंड बैंक कहीं है तो वह बाड़मेर, जैसलमेर और फलोदी क्षेत्र में है। उन्होंने याद दिलाया कि 1965 और 1971 के युद्ध के दौरान सीमा को मजबूत करने में इसी क्षेत्र के लोगों का महत्वपूर्ण योगदान रहा है।
भाटी ने कहा कि आज ओरण भूमि को बचाने के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है, जबकि लगभग 6 लाख हेक्टेयर भूमि ओरण के रूप में संरक्षित है। उन्होंने चिंता जताई कि यदि ओरण और गोचर भूमि खत्म हो गई तो गौवंश के लिए स्थान कहां बचेगा।
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उन्होंने आरोप लगाया कि हर कैबिनेट बैठक में भूमि आवंटन किए जा रहे हैं और विकास के नाम पर संसाधनों का दुरुपयोग हो रहा है। सरकार से सवाल करते हुए उन्होंने पूछा कि आखिर किन लोगों को लाभ पहुंचाया जा रहा है और क्षेत्र के लोगों की चिंता किसे है?
विधायक ने मांग की कि लैंड अलॉटमेंट को नियंत्रित करने के लिए विशेष नीति बनाई जाए। उन्होंने कहा कि सोलर परियोजनाएं और विकास दोनों जरूरी हैं, लेकिन इसके लिए स्पष्ट नीति होनी चाहिए। बिजली नीति को लेकर भी उन्होंने सरकार के रुख पर सवाल उठाते हुए पूछा कि क्या सरकार मल्टीनेशनल कंपनियों के दबाव में है? साथ ही उन्होंने खेजड़ी वृक्ष को बचाने के लिए विधेयक लाने की मांग भी की।