राजस्थान में नरेश मीणा से जुड़े घटनाक्रम को लेकर सांसद राजकुमार रौत ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि जो कुछ भी हुआ, वह बिल्कुल ठीक नहीं था। उनका मानना है कि नरेश मीणा को मानसिक रूप से इतना प्रताड़ित किया गया कि वह चुनाव के दौरान बौखला गया और यह पूरी घटना घटित हुई।
रौत ने कहा कि चौरासी विधानसभा उपचुनाव के दौरान उन्होंने भी ऐसी स्थिति का सामना किया था, जब पूरी सरकारी मशीनरी चुनाव को प्रभावित करने में लगी हुई थी लेकिन उन्होंने संयम बनाए रखा। वहीं नरेश मीणा अपने संयम को खो बैठे और अब पुराने मामलों को इकट्ठा करके उसकी जमानत रोकी जा रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि ऐसा ही चलता रहा तो कोई भी उपचुनाव नहीं लड़ पाएगा और सारी सीटें सीधे सरकार को ही दे दी जाएंगी।
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सांसद ने कहा कि नरेश मीणा ने जो किया उसका वे समर्थन नहीं करते लेकिन पुलिस की कार्रवाई भी सही नहीं थी। उन्होंने आरोप लगाया कि जब नरेश ने थप्पड़ मारा था, तब उसे दिन में ही गिरफ्तार किया जा सकता था लेकिन ऐसा नहीं किया गया। इसके बजाय रात के समय जब लोग धरने पर बैठे थे और खाना बना रहे थे, तब पुलिस ने उन पर कार्रवाई की, उनकी गाड़ियों को जलाया गया। उन्होंने कहा कि धरने पर बैठा कोई व्यक्ति अपनी ही गाड़ी क्यों जलाएगा? इस घटना को लेकर कई लोगों के बयान आए हैं, जिनमें पुलिस पर बर्बरता का आरोप लगाया गया है।
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उन्होंने इस पूरे घटनाक्रम को कुछ लोगों द्वारा अपनी राजनीति चमकाने की कोशिश बताया। हालांकि उन्होंने इस मामले पर ज्यादा टिप्पणी करने से बचते हुए उन्होंने कहा कि वे इस मुद्दे पर ज्यादा बात नहीं करेंगे।
तेजाजी की मूर्ति तोड़े जाने की घटना पर भी सांसद ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने इसे दुर्भाग्यपूर्ण करार देते हुए कहा कि ऐसा करने वाले समाज विरोधी तत्वों को कड़ी सजा मिलनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे विचार समाज में क्यों पनप रहे हैं, इसे समझने और रोकने की जरूरत है। जो लोग इस तरह की भावना को भड़काते हैं या इसका समर्थन करते हैं, उन पर भी सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।