भील प्रदेश की मांग को लेकर सांसद राजकुमार रोत से खास बातचीत
राजस्थान, मध्यप्रदेश, गुजरात और महाराष्ट्र के 49 जिलों को मिलाकर अलग भील प्रदेश की मांग कर रही भारत आदिवासी पार्टी के सांसद राजकुमार रोत का कहना है, यह मांग आजादी से पहले की है। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे को लेकर आजादी से पहले से आंदोलन चलते रहे हैं। पहले बीजेपी-कांग्रेस के कई नेता भी इसका समर्थन कर चुके हैं। अमर उजाला से एक्सक्लूसिव बातचीत करते हुए सांसद राजकुमार रोत ने इस मुद्दे से जुड़े सवालों के जवाब दिए। पेश है बातचीत के अंश...
सवाल: भील प्रदेश की मांग को लेकर गुरुवार को महारैली हुई, अचानक यह मांग क्यों की जा रही?
यह मांग नई नहीं है। आजादी से पहले से यह मांग चली आ रही है। आदिवासी के आराध्य गोविंद गुरु ने भील प्रदेश की मांग को लेकर आंदोलन किया था। यहां तक की अंग्रेजों के समय भी इस हिस्से को भील प्रदेश के रूप में दर्शाया जाता था। कांग्रेस और बीजेपी के नेताओं ने भी समय-समय पर भील प्रदेश की मांग का समर्थन किया है। हमारी पार्टी भी इस मांग को लेकर आंदोलन कर रही है।
सवाल: सरकार के टीएडी मंत्री बाबूलाल खराड़ी ने तो कहा है कि जाति के अधार पर स्टेट नहीं बन सकता?
हमारी मांग जाति के आधार पर नहीं है। यह मांग क्षेत्रीयता और रहन-सहन, बोलचाल और परंपराओं के आधार पर की जा रही है। क्षेत्रीय आधार पर राजस्थान में पहले भी राज्यों का गठन हुआ है। इसके अलावा भी अन्य कई मुद्दे हैं, जिनके आधार पर हम अलग भील प्रदेश की मांग कर रहे हैं।
सवाल: आप कांग्रेस के साथ गठबंधन में हैं, लेकिन अलग भील प्रदेश की मांग को लेकर अब तक कांग्रेस ने आधिकारिक रूप से कोई बयान आपके समर्थन में क्यों नहीं दिया?
कांग्रेस ही नहीं बीजेपी के नेताओं ने भी समय-समय पर अलग भील प्रदेश की मांग उठाई है। कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में शामिल हुए महेंद्रजीत मालवीय भी अलग भील प्रदेश की मांग उठा चुके हैं। लेकिन हम इस मुद्दे को उठा रहे हैं तो श्रेय छिन जाने के डर से कांग्रेस और बीजेपी के नेता इस मामले में कुछ भी बोलने से झिझक रहे हैं।