राजस्थान के विधि विभाग ने गंभीर त्रुटि करते हुए समाप्त हो चुके कानून के तहत 12 जिलों की अदालतों में सरकारी अधिवक्ताओं की नियुक्ति के आदेश जारी कर दिए। यह मामला इसलिए भी गंभीर हो गया है क्योंकि विधि विभाग ही कानून की समस्त जिम्मेदारियों का निर्वहन करता है।
विभाग के इन आदेशों के बाद कानून विशेषज्ञों और जानकारों ने इसे पूरी तरह अवैध और असंवैधानिक बताया है। उनका कहना है कि जिन कानूनों की अवधि 30 जून को समाप्त हो चुकी है, उनके तहत की गई नियुक्तियां किसी भी प्रकार से वैध नहीं हैं।
यह चूक सामने आने के बाद विभाग में हड़कंप मच गया है। सूत्रों के अनुसार विभाग इस गलती को सुधारने के लिए संशोधित आदेश जारी करने की तैयारी में है।
विधि विभाग का कहना है कि कानून के अनुसार भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 18(3) के तहत सरकारी अधिवक्ताओं की नियुक्ति की जा सकती है लेकिन विभाग ने गलती से समाप्त हो चुकी सीआरपीसी की धारा 24(3) के तहत नियुक्ति के आदेश जारी कर दिए।
इस प्रकार की गंभीर त्रुटियों से विधि विभाग की कार्यक्षमता पर सवाल खड़े हो गए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में विभाग को अधिक सावधानी बरतनी चाहिए और उचित कानूनी प्रक्रिया का पालन करना चाहिए, ताकि भविष्य में इस प्रकार की गलतियां न हों।