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Rajasthan News: नवरात्र के साथ ही आज राजस्थान स्थापना दिवस भी, जानिये सात चरणों में कैसे यहां तक पहुंचा प्रदेश

Sun, 30 Mar 2025 09:31 AM IST
प्रिया वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर

सार

चैत्र नवरात्र के साथ ही आज राजस्थान का स्थापना दिवस भी है। आज राजस्थान जिस स्वरूप में है, उसके लिए 7 चरणों में अलग-अलग रियासतों का विलय हुआ। राजस्थान की पहली विधानसभा का गठन 23 फरवरी 1952 को हुआ और पहला बजट 4 अप्रैल 1952 को वित्त मंत्री नाथूराम मिर्धा ने जयपुर स्थित पुरानी विधानसभा में पढ़ा।
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स्थापना दिवस पर जगमगाई विधानसभा - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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आज चैत्र नवरात्र के साथ राजस्थान की स्थापना का भी दिन है। राजस्थान आज जिस स्वरूप में उसे यहां तक पहुंचने के लिए एक लंबा असरा लगा। अलग-अलग रिसायसतों के 7 चरणों में विलय होने के बाद राजस्थान बना। इसकी शुरुआत सबसे पहले 17 मार्च 1948 को मतस्य संघ से हुई। इसके बाद संयुक्त राजस्थान और फिर संयुक्त वृहद राजस्थान बना।

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राजस्थान बनने के ये 7 चरण

30 मार्च 1949 , चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को 19 रिसायतों और 3 ठिकानों से मिलकर राजस्थान बना। इसके बाद राजस्थान के एकीकरण का काम 7 चरणों में पूरा हुआ।

सबसे पहले 17 मार्च 1948 को मत्स्य संघ बना। इसमें अलवर, भरतपुर, धौलपुर और करौली शामिल हुए।

25 मार्च 1948- राजस्थान संघ-  बांसवाड़ा, बूंदी, डूंगरपुर, झालावाड़, किशनगढ़, कोटा, प्रतापगढ़, शाहपुरा और टोंक।

संयुक्त राज्य राजस्थान- 18 अप्रैल 1948 को उदयपुर भी संघ में शामिल हो गया

30 मार्च 1949 को  वृहद राजस्थान-  बीकानेर, जोधपुर, जैसलमेर और जयपुर भी राजस्थान संघ में शामिल।

संयुक्त वृहद राजस्थान- 15 मई 1949- मत्स्य संघ का वृहद राजस्थान में विलय।

6-26 जनवरी 1950- संयुक्त राजस्थान की 18 रियासतें सिरोही रियासत में विलय कर गईं आबू को छोड़कर।

पुनगर्ठित राजस्थान- राज्य पुनर्गठन अधिनियम के तहत भाग सी राज्य अजमेर, आबू रोड तालूका और सिरोही रियासत का पूर्व भाग जो कि पूर्व राज्य बम्बई में विलीन हो गया था तथा पूर्व मध्य भारत का सुनेल टप्पा क्षेत्र राजस्थान में विलीन कर दिया गया।

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राजस्थान की पहला विधानसभा सत्र- 23 फरवरी 1952 को राजस्थान की पहली विधानसभा का गठन हुआ था। इस समय निर्वाचित मुख्यमंत्री टीकाराम पालीवाल बने। हालांकि वृहद राजस्थान के पहले सीएम हीरालाल शास्त्री थे।  इस वक्त राजस्थान में कुल 160 विधानसभा सीटें थीं, जो बाद में पुनर्गठित होते-होते 200 हो गईं अब मौजूदा मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा राज्य के 24वें सीएम हैं।

पहला बजट 17 करोड़- अब 5 लाख 35 हजार करोड़

राजस्थान का पहला बजट 4 अप्रैल 1952 में वित्त मंत्री नाथूराम मिर्धा ने पेश किया था और उस वक्त राजस्थान का कुल बजट 17 करोड़ 25 लाख रुपए था। यह पूरी तरह टैक्स फ्री बजट था। इस बार भजनलाल सरकार ने जो बजट पेश किया है, उसका आकार 5 लाख 35 हजार करोड़ रुपए का है।

4 अप्रैल 1952 को पहला बजट पेश करते हुए मिर्धा ने कहा था कि जिस संयुक्त राजस्थान का हम सपना संजोए हुए थे, उसका पहला बजट पेश करने की जिम्मेदारी मेरे ऊपर आई है। 23 फरवरी 1952 को राजस्थान की पहली विधानसभा का गठन हुआ था।

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4 गुना बढ़ी आबादी

राजस्थान में मौजूदा समय में आबादी लगभग 8 करोड़ मानी जा रही है। साल 2011 में हुई जनगणना में राजस्थान की आबादी 6 करोड़ 85 लाख बताई गई थी। अब अनुमान है कि इसमें लगभग 16.72 प्रतिशत की बढ़ोतरी हो चुकी है लेकिन भारत-संघ में शामिल होते समय राजस्थान की जनसंख्या 201.5 लाख थी, जिसमें 1951 में 8.95 लाख शिक्षित नागरिक थे।
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पहले गांवों में 83 प्रतिशत आबादी- आज 2 करोड़ शहरों में

आर्थिक समीक्षा रिपोर्ट के अनुसार मौजूदा समय में राजस्थान की 2 करोड़ से ज्यादा जनसंख्या शहरों में रह रही है। प्रतिशत के हिसाब से देखें तो यह लगभग 27 प्रतिशत है, जबकि राजस्थान के गठन की शुरुआत में कुल भू क्षेत्र 3 लाख 40 हजार वर्ग किमी था। इसमें से मात्र 0.01 लाख वर्ग किमी ही शहरी क्षेत्र था। तब 32,240 गांवों में राजस्थान की 83.7 प्रतिशत आबादी रहती थी।

राजस्थान की भूमि का 56.8 प्रतिशत भाग एकदम सूखा रेगिस्तानी क्षेत्र था। राजस्थान वास्तव में तो छोटी-छोटी ढाणियों, गवाडों, गांवों तथा बिखरी हुई आबादी-बस्तियों का प्रदेश था। जब भू अभिलेख निदेशालय की स्थापना की गई थी, उस समय 3,387,94 वर्ग किमी में से केवल 2,136,42 वर्ग किमी क्षेत्र ही ‘बंदोबस्त’ के अन्तर्गत आ पाया था। यहां तक कि पटवार-संस्था केवल 1,736,02 वर्ग किमी क्षेत्र में ही उपलब्ध थी।

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