राजस्थान में होम वोटिंग के लिए प्रथम चरण में 36 हजार से अधिक फॉर्म स्वीकृत हुए हैं, जिसका मतदान पांच अप्रैल से होगा। वहीं, द्वितीय चरण के लिए 40 हजार से अधिक फॉर्म पंजीकरण हुए हैं, जिसका मतदान 14 अप्रैल से होगा।
श्रीगंगानगर: 3,430 (2,315-1,115)
बीकानेर: 3,695 (2,858-738)
चूरू: 4,058 (2,997-1,061)
झुंझुनूं: 3,158 (2,290-868)
सीकर: 4,909 (3,848-1,061)
जयपुर ग्रामीण: 3,969 (3,129-840)
जयपुर: 3,632 (3,134-498)
अलवर: 2,071 (1,317-754)
भरतपुर: 1,598 (1,114-484)
करौली-धौलपुर: 2,125 (1,530-595)
दौसा: 2,454 (1,863-591)
नागौर: 1,558 (1,048-510)
दूसरा चरण: बाड़मेर में सर्वाधिक 5,135 पंजीकरण
गुप्ता ने बताया कि दूसरे चरण में मतदान वाले 13 लोकसभा निर्वाचन क्षेत्रों में होम वोटिंग के लिए पंजीकरण का कार्य पूरा हो गया है। इन क्षेत्रों में कुल 40 हजार से अधिक पात्र मतदाताओं ने पंजीकरण कराया है। इसमें 31 हजार 511 वरिष्ठ नागरिक और 8 हजार 567 दिव्यांग मतदाता शामिल हैं। निर्वाचक अधिकारी होम वोटिंग का विकल्प चयन करने वाले मतदाताओं की सूची सभी मान्यता प्राप्त राजनैतिक दलों और उम्मीदवारों को आठ अप्रैल तक उपलब्ध कराएंगे। विशेष मतदान दल गठित कर उनके प्रशिक्षण की सभी प्रक्रिया 13 अप्रैल तक पूरी कर ली जाएगी। होम वोटिंग के लिए मतदान प्रक्रिया 14 अप्रैल से शुरू होकर 21 अप्रैल तक चलेगी। किसी कारण से मतदाता के होम वोटिंग के लिए अनुपस्थित या वंचित रह जाने पर दूसरा दौर 22 से 23 अप्रैल के बीच होगा।
लोकसभा निर्वाचन क्षेत्रवार कुल पंजीकृत (बुजुर्ग-दिव्यांग) मतदाता
टोंक-सवाई माधोपुर: 2,695 (1,976-719)
अजमेर: 3,036 (2,253-783)
पाली: 3,801 (3,147-654)
जोधपुर: 2,842 (2,428-414)
बाड़मेर: 5,135 (4,444-691)
जालौर: 3,460 (2,778-682)
उदयपुर: 3,221 (2,630-591)
बांसवाड़ा: 1,832 (1,368-464)
चित्तौड़गढ़: 3,759 (3,007-752)
राजसमंद: 2,283 (1,718-565)
भीलवाड़ा: 2,596 (1,986-610)
कोटा: 2,751 (2,071-680)
झालावाड़-बारां: 2,667 (1,705-962)
गुप्ता ने बताया कि होम वोटिंग के प्रति लोकसभा आम चुनाव में राज्य विधानसभा चुनाव 2023 से भी ज्यादा उत्साह है। विधानसभा चुनाव के दौरान 61 हजार 628 पात्र मतदाताओं ने पंजीकरण कराया था। इस बार यह आंकड़ा 76 हजार के पार पहुंच गया है। होम वोटिंग के लिए राज्य विधानसभा चुनाव 2023 में 80 साल से अधिक आयु के मतदाता पात्र थे। लोकसभा चुनाव के दौरान इसे बढ़ाकर 85 साल किया गया है। पात्र मतदाताओं की संख्या पहले के मुकाबले कम होने के बावजूद भी होम वोटिंग के लिए अधिक रुझान निर्वाचन विभाग द्वारा ‘कोई मतदाता न छूटे’ के उद्देश्य के साथ किए गए प्रयासों का ही परिणाम है।