राजस्थान हाईकोर्ट ने SDM को थप्पड़ मारने के आरोपी निर्दलीय प्रत्याशी नरेश मीणा की जमानत याचिका को बुधवार को खारिज कर दिया है। यह आदेश जस्टिस अनिल कुमार उपमन ने दोनों पक्ष को सुनने के बाद दिया। उन्होंने नरेश मीणा को जमानत देने से इनकार कर दिया।
बता दें कि सुनवाई के दौरान नरेश मीणा की ओर से कहा गया कि वह लंबे समय से जेल में हैं। यह इतना बड़ा मामला नहीं है, जितना विपक्ष की ओर से बताया जा रहा है। यह एक मामूली मामला है, जिसमें उसे जमानत का लाभ दिया जाना चाहिए। वहीं, सरकार की ओर से कहा गया कि नरेश मीणा ने विधानसभा उपचुनाव के दौरान चुनाव ड्यूटी में कार्यरत अधिकारी को थप्पड़ मारा है। जनप्रतिनिधि के लिए इस तरह कृत्य ठीक नहीं है। इसके बाद जस्टिस ने नरेश मीणा की जमानत याचिका को खारिज कर दिया।
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हालांकि, नरेश मीणा की जमानत खारिज होने के बाद उनके वकील की प्रार्थना पर हाईकोर्ट ने याचिका को वापस लेने की अनुमति दे दी। इसके बाद अब याचिका को मेरिट के आधार पर खारिज नहीं मानते हुए वापस लेते हुए खारिज माना जाएगा।
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ज्ञात रहे कि बीते साल 13 नवंबर को देवली-उनियारा विधानसभा के उपचुनाव के लिए मतदान हुआ था। इसमें समरावता गांव के लोगों ने उनके गांव को उनियारा उपखंड कार्यालय में शामिल करने की मांग को लेकर मतदान का बहिष्कार कर रखा था। उस समय निर्दलीय प्रत्याशी रहे नरेश मीणा भी ग्रामीणों की मांग वाजिब बताते हुए ग्रामीणों के साथ धरने पर बैठ गया था।
मतदान बहिष्कार के बावजूद तीन लोगों के जबरन वोट दिलाने का आरोप लगाते हुए नरेश मीणा ने SDM अमित चौधरी के थप्पड़ मार दिया था। दूसरे दिन 14 नवंबर को पुलिस ने नरेश मीणा को धरना स्थल से गिरफ्तार कर लिया था। फिर कोर्ट के आदेश पर 15 नवंबर को जेल भेज दिया था। इस केस में उनियारा कोर्ट और फिर टोंक कोर्ट से जमानत याचिका गत दिनों खारिज हो गई थी।
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हाईकोर्ट में नरेश मीणा की जमानत के लिए पैरवी कर रहे एडवोकेट डॉक्टर महेश शर्मा, एडवोकेट लाखन सिंह मीणा ने बताया कि बताया कि 13 जनवरी को SDM अमित चौधरी के थप्पड़ मारने के मामले में हाईकोर्ट में नरेश मीणा की जमानत याचिका लगाई थी। उस पर सुनवाई की इससे पहले पांच बार तारीख मिल चुकी है, लेकिन सुनवाई का नंबर नहीं आया था।
छठी बार में 10 मार्च को हाईकोर्ट में सुनवाई शुरू हुई। उस समय भी व्यस्तता के चलते न्यायाधिपति ने 12 मार्च की सुनवाई के लिए नई तारीख दे दी थी। 12 मार्च को सुनवाई शुरू होते ही फिर व्यस्तता के चलते इस केस में सुनवाई के लिए कोर्ट ने 18 मार्च की नई तारीख दी थी। लेकिन समय की व्यस्तता के चलते जज ने सुनवाई होनी थी, लेकिन न्यायाधिपति ने सुनवाई के लिए 19 मार्च की तारीख दे दी थी। ऐसे में आज इस पर सुनवाई हुई। दोनों पक्ष की दलील सुनने के बाद जज ने जमानत ख़ारिज कर दी।