फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Rajasthan: हाईकोर्ट का बड़ा फैसला- एक साथ दो पदों पर नियुक्ति नहीं, RSRTC एमडी को परिवहन आयुक्त पद से हटाया

Sat, 02 May 2026 10:56 AM IST
जयपुर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर

सार

प्रशासनिक फैसलों पर अहम टिप्पणी करते हुए राजस्थान हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि नियामक और संचालन से जुड़े पद एक ही व्यक्ति के पास नहीं हो सकते। इसी के चलते आरएसआरटीसी एमडी को परिवहन आयुक्त के पद से दूर रहने का आदेश दिया गया है।
 
विज्ञापन
राजस्थान हाईकोर्ट, जयपुर - फोटो : सोशल मीडिया
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

राजस्थान हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण अंतरिम आदेश में राज्य सरकार के प्रशासनिक निर्णय पर हस्तक्षेप करते हुए स्पष्ट किया है कि कोई भी अधिकारी एक साथ दो ऐसे पदों पर कार्य नहीं कर सकता, जिनमें हितों का टकराव संभावित हो। इसी के चलते अदालत ने राजस्थान राज्य पथ परिवहन निगम के प्रबंध निदेशक पुरुषोत्तम शर्मा को परिवहन आयुक्त के पद पर कार्य करने से तत्काल प्रभाव से रोक दिया है।

विज्ञापन


यह आदेश न्यायमूर्ति आनंद शर्मा की एकल पीठ ने ऑल इंडिया टूरिस्ट परमिट बस ओनर्स एसोसिएशन द्वारा दायर याचिका पर सुनाया। याचिकाकर्ता ने पुरुषोत्तम शर्मा को दोनों पदों पर नियुक्त करने को कानून के विरुद्ध बताते हुए इसे हितों के टकराव का स्पष्ट मामला बताया था।

अदालत ने प्रथम दृष्टया माना कि मामला गंभीर है और इसमें कानूनी प्रावधानों का उल्लंघन दिखाई देता है। कोर्ट ने 21 नवंबर 2025 के उस सरकारी आदेश पर रोक लगा दी, जिसके तहत आरएसआरटीसी एमडी को परिवहन आयुक्त का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया था।
विज्ञापन


ये भी पढ़ें: Rajasthan: 'विदेशी भाषा कौशल कार्यक्रम से युवाओं को वैश्विक अवसर, 351 परीक्षाएं पारदर्शी'; CM भजनलाल ने कहा

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता पक्ष के अधिवक्ताओं ने दलील दी कि आरएसआरटीसी स्वयं एक सरकारी परिवहन कंपनी है, जिसका सीधा वित्तीय और प्रशासनिक हित परिवहन क्षेत्र में है। ऐसे में उसी संस्था का प्रमुख यदि राज्य के परिवहन तंत्र का नियामक भी बने तो निष्पक्षता प्रभावित होगी।

अदालत ने यह भी कहा कि परिवहन आयुक्त के पास परमिट जारी करने, नियम लागू कराने और क्षेत्रीय परिवहन प्राधिकरणों पर नियंत्रण जैसे महत्वपूर्ण अधिकार होते हैं। ऐसे संवेदनशील पद पर किसी ऐसे व्यक्ति की नियुक्ति, जिसका क्षेत्र में प्रत्यक्ष हित हो, न्यायसंगत नहीं मानी जा सकती।

मामले में मोटर वाहन अधिनियम की धारा 68(2) का भी हवाला दिया गया, जिसमें स्पष्ट किया गया है कि परिवहन व्यवसाय से जुड़े हित रखने वाले व्यक्ति को परिवहन प्राधिकरण में शामिल नहीं किया जा सकता। अदालत ने इसी सिद्धांत को आधार बनाते हुए कहा कि खिलाड़ी और रेफरी एक ही व्यक्ति नहीं हो सकता।
विज्ञापन


हालांकि सरकार की ओर से यह तर्क दिया गया कि परिवहन आयुक्त एकल निर्णय नहीं लेते, बल्कि एक बोर्ड का हिस्सा होते हैं लेकिन अदालत इस दलील से संतुष्ट नहीं हुई और पुरुषोत्तम शर्मा को नोटिस जारी करते हुए अगली सुनवाई 18 मई 2026 निर्धारित की है और तब तक उनके परिवहन आयुक्त के रूप में कार्य करने पर रोक बरकरार रखी है।

और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें