एक ओर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष जोशी भाजपा के आज के प्रदर्शन पर सबकी तारीफ मिल रही है वहीं दूसरी ओर वसुंधरा राजे का महाघेराव से दूरी बनाना रंग में भंग का काम कर रहा है।
भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा के द्वारा इस अभियान की शुरुआत की गई थी। उस दौरान वसुंधरा राजे मौजूद रही थीं और मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की सरकार को जमकर कोसा भी था। राजे प्रधानमंत्री की सीकर सभा में भी मौजूद थीं, जहां से प्रधानमंत्री ने 'नहीं सहेगा राजस्थान' का आव्हान किया था। 29 जुलाई को राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा के एक दिवसीय प्रदेश के दौरे में भी वसुंधरा राजे मौजूद थीं। उसी दिन राजे को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष भी बनाया गया था, परंतु एक अगस्त को एसा क्या हुआ जो पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे महाघेराव में नहीं पहुंचीं। यह सवाल पूरा प्रदेश का भाजपा कार्यकर्ता जानना चाहते हैं।
प्रधानमंत्री के आह्वान के बाद यह माहघेराव पूरी पार्टी का कार्यक्रम बन गया था, जिसका प्रधानमंत्री ने दोबारा ट्वीट कर यह निश्चित कर दिया कि केंद्र पूरी नजर बनाए हुए है, फिर भी वसुंधरा राजे का कार्यक्रम से दूरी बनाना सीधे रूप से केंद्र को चुनौती देने जैसे दिखाई दे रहा है।
हालांकि राजे ने दोपहर दो बजे एक ट्वीट किया परंतु उसमें भी प्रदेश के कार्यकर्ताओं और प्रदेश की टीम के लिए कुछ नहीं था, राजे ने ट्वीट कर लिखा कि...'आज राजस्थान में जो महिला अत्याचार की घटनाएं बढ़ रही हैं, उसका कारण सिर्फ और सिर्फ हमारे कामों पर ध्यान नहीं देना है। प्रधानमंत्री जी ने भी सीकर, बीकानेर, आबू दौरे के दौरान राजस्थान में महिला उत्पीड़न के बढ़ रहे आंकड़ों पर कड़े शब्दों में चिंता जाहिर करते हुए कहा था कि ऐसी भयावह स्थिति पहले कभी नहीं देखी गई है। जयपुर का महाघेराव जनता के इसी रोष का परिणाम है।'
वसुंधरा राजे का घेराव से दूरी
सूत्रों ने बताया कि यह ट्वीट भी घेराव में भीड़ की संख्या का आकलन करने के बाद किया गया। सूत्र बताते हैं कि प्रदेश में बिना वसुंधरा राजे के भीड़ जुटाना सम्भव नहीं है परंतु आज के प्रदर्शन ने सभी अटकलों पर विराम लगा दिया है। वसुंधरा राजे का घेराव से दूरी बनाना और केंद्र के शामिल होने के बाद भी कार्यक्रम में नहीं पहुंचना किसी बड़ी बात की ओर इशारा कर रहा है, जो आने वाले समय में प्रदेश की राजनीति को रोचक बनाएगा।
ये है मसला
खबर थी कि पिछले दिनों राष्ट्रीय अध्यक्ष नड्डा के कार्यक्रम में भी राजे जल्दी निकल गई थीं। राजे के जल्दी निकलने के पीछे मैडम की नाराजगी की भी खबर थी। खबर थी की नड्डा की बैठक में चुनाव प्रचार समिति के अध्यक्ष पद के लिए वसुंधरा राजे और अर्जुन मेघवाल के नामों की चर्चा जोरों पर रही थी, इसके बाद राजे नाराज हो गई थीं और प्रदेश कार्यालय से चली गई थी।