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Rajasthan: 'कांग्रेस ने हमेशा देश विरोध की ही बात की', अनुच्छेद 370 के मुद्दे पर बोले मुख्यमंत्री भजन लाल

Sun, 10 Nov 2024 12:05 PM IST
शबाहत हुसैन न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर

सार

Rajasthan: पूर्ववर्ती राज्य का विशेष दर्जा बहाल करने के लिए केंद्र और निर्वाचित प्रतिनिधियों के बीच बातचीत की मांग वाला प्रस्ताव बुधवार को जम्मू-कश्मीर विधानसभा में पारित किया गया था। इस पर ही राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा अपनी प्रतिक्रिया दे रहे थे।
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मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा का एक बयान इन दिनों सोशल मीडिया पर चर्चा में है। दरअसल, जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेउ 370 की बहाली की नेशनल कॉन्फ्रेंस की मांग को लेकर मचे सियासी बवाल पर भजन लाल ने शुक्रवार को एक बयान दिया। इसी बयान का वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है। जम्मू-कश्मीर में कांग्रेस का एनसी के साथ गठबंधन है। इसे ही लेकर इस वीडियो में सीएम भजन लाल शर्मा ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर हमला बोला।

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वीडियो में सीएम यह कहते नजर आ रहे हैं, 'देश के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस देश के कलंक को हटाने का काम किया है। गृहमंत्री अमित शाह ने इस देश के कलंक को हटाने का काम किया, लेकिन जम्मू कश्मीर के अंदर कल आपने देखा होगा, ये कांग्रेस के लोग उनके साथ खड़े हैं। ये जिस तरह की बात करते हैं। इन्होंने हमेशा देश के विरोध में बात की है।'

क्या है मामला? 
दरअसल, पूर्ववर्ती राज्य का विशेष दर्जा बहाल करने के लिए केंद्र और निर्वाचित प्रतिनिधियों के बीच बातचीत की मांग वाला प्रस्ताव बुधवार को जम्मू-कश्मीर विधानसभा में पारित किया गया था। इसे लेकर विपक्षी सदस्यों ने जमकर हंगामा किया था। भाजपा विधायकों ने विधानसभा अध्यक्ष के खिलाफ नारे लगाए और प्रस्ताव की प्रतियां फाड़ दी थीं। भाजपा ने कहा था कि वह सदन की कार्यवाही तब तक चलने नहीं देगी, जब तक प्रस्ताव को वापस नहीं लिया जाता। चूंकि, कांग्रेस यहां नेशनल कॉन्फ्रेंस की सहयोगी है, इसलिए वह भाजपा के निशाने पर है।
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भाजपा ने किया था सख्त विरोध
विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष सुनील शर्मा ने कहा कि यह एक अवैध प्रस्ताव है। अनुच्छेद-370 के प्रवाधानों को लोकतंत्र के शीर्ष मंदिर संसद ने निरस्त किया है। इस अनुच्छेद में तत्कालीन जम्मू-कश्मीर राज्य को विशेष दर्जा देने का प्रावधान था। फिर कुछ लोगों ने संसद के फैसले को उच्चतम न्यायालय में चुनौती दी। अदालत ने संसद के फैसले को सही करार दिया। तो उन्हें यह प्रस्ताव लाने का क्या संवैधानिक अधिकार है?

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