राजस्थान पुलिस की सीआईडी (इंटेलिजेंस) ने पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई (ISI) के लिए कथित रूप से फंडिंग नेटवर्क संचालित करने वाले एक एजेंट को गिरफ्तार कर देश विरोधी गतिविधियों से जुड़े बड़े नेटवर्क का खुलासा किया है। जांच में सामने आया है कि आरोपी भारत में मौजूद कथित जासूसों तक आईएसआई की ओर से जासूसी के एवज में मिलने वाली रकम पहुंचाने का काम करता था। भुगतान के लिए बिटकॉइन, क्यूआर कोड और 'पे-पर-टास्क' मॉडल का इस्तेमाल किया जाता था।
जांच एजेंसी के अनुसार, भारत में बैठे जासूस अपने क्यूआर कोड पाकिस्तान स्थित हैंडलरों को भेजते थे। इसके बाद आईएसआई के हैंडलर भारत में सक्रिय फंडिंग एजेंट को भुगतान का संकेत देते थे। एजेंट संबंधित जासूसों तक रकम पहुंचाता था। प्रत्येक गोपनीय सूचना के बदले उन्हें 'पे-पर-टास्क' के आधार पर भुगतान किया जाता था।
पहले हुई गिरफ्तारियों से खुला नेटवर्क
सीआईडी (इंटेलिजेंस) ने इसी वर्ष जनवरी में जैसलमेर निवासी झबरा राम और असम के डिब्रूगढ़ एयरफोर्स स्टेशन पर एमटीएस कर्मचारी सुमित कुमार को गिरफ्तार किया था। दोनों पर भारतीय सेना से जुड़ी गोपनीय सूचनाएं पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई के हैंडलरों तक पहुंचाने का आरोप है।
इन दोनों मामलों की गहन जांच के दौरान पता चला कि जासूसी के बदले मिलने वाली रकम महाराष्ट्र के औरंगाबाद निवासी रफीक चांद शेख के माध्यम से भेजी जाती थी।
चार साल से ISI हैंडलर के संपर्क में था आरोपी
सीआईडी (इंटेलिजेंस) की पूछताछ में रफीक चांद शेख ने कथित रूप से स्वीकार किया कि वह पिछले करीब चार वर्षों से आईएसआई के एक हैंडलर के संपर्क में था। उसकी मुलाकात सोशल मीडिया के जरिए हुई थी और वहीं से उसे नेटवर्क संचालित करने के निर्देश मिलते थे।
जांच में सामने आया कि आरोपी ने अपने नाम के अलावा अन्य लोगों के नाम से भी कई बैंक खाते खुलवाए। इन खातों का इस्तेमाल कथित रूप से जासूसी गतिविधियों में शामिल लोगों तक पैसे पहुंचाने के लिए किया जाता था।
बिटकॉइन और बैंक खातों के जरिए होती थी फंडिंग
प्रारंभिक जांच के अनुसार नेटवर्क में फंड ट्रांसफर के लिए क्रिप्टोकरेंसी (बिटकॉइन) और विभिन्न बैंक खातों का इस्तेमाल किया जाता था, ताकि लेन-देन को छिपाया जा सके और जांच एजेंसियों की नजर से बचा जा सके।
सीआईडी (इंटेलिजेंस) अब इस पूरे नेटवर्क की वित्तीय लेन-देन, डिजिटल ट्रेल और अन्य संभावित सहयोगियों की भूमिका की जांच कर रही है। एजेंसी यह भी पता लगा रही है कि इस नेटवर्क के जरिए देश के अन्य राज्यों में सक्रिय लोगों तक भी धनराशि पहुंचाई गई थी या नहीं।