भांकरोटा अग्निकांड को अभी एक महीना भी पूरा नहीं हुआ और फिर एक बड़ा हादसा हो गया। उसी मोड़ पर ठीक पहले की की तरह कोयले से भरा ट्राला पलट गया। भांकरोटा में कोयला ओवरलोड ट्राला पलटने की घटना ने प्रशासन और नेशनल हाईवे अथॉरिटी की लापरवाही उजागर कर दी है। गनीमत रही कि ये हादसा दिन के समय हुआ और किसी के हताहत होने की खबर नहीं है। एक माह के अंदर उसी मोड़ पर घटी ये घटना अपने आप में कई सवाल खड़े कर रही है।
आज के हादसे में सीसीटीवी फुटेज में यह साफ दिख रहा है कि एक ओवरलोड ट्राला यू टर्न करते हुए सड़क के बीचो-बीच पलट गया। गनीमत रही कि इस दौरान कोई वाहन ट्रक के आसपास नहीं था। वरना वो इसके नीचे दब जाता। दिन का समय था ट्रैफिक लाइट चालू थी इसलिए हादसा गंभीर होने से बच गया। इसके अलावा गनीमत ये भी रही कि हादसे के बाद ट्राला में आग नहीं लगी अन्यथा बड़ा हादसा हो सकता था, क्योंकि ट्राला कोयले से भरा हुआ था।
आग लगती तो कोयला तेजी से आग पकड़ सकता था और ये हादसा काफी गंभीर हो सकता था। यह हादसा फिर एक बार सवाल खड़े कर रहा है कि क्यों बार-बार इस मोड़ पर ऐसी घटनाएं होती जा रही हैं। प्रशासन ने आंखें मूंद रखी हैं। सवाल ये भी है कि क्यों नेशनल हाईवे अथॉरिटी इसके ऊपर कोई एक्शन नहीं ले रहा है? पिछले गैस टैंकर ब्लास्ट हादसे के बाद मुख्यमंत्री ने बैठक की थी, जिसमें साफ निर्देश दिए गए थे कि इस ब्लैक स्पॉट्स को बंद किया जाए, परंतु मुख्यमंत्री के निर्देश के बावजूद ये बेरहम और खतरनाक कट खुला हुआ है। भारी ट्रैफिक के बाद भी इस कट पर वाहन बिना रोकटोक यू टर्न लेकर जा रहे हैं। इस वजह से निरंतर हादसे हो रहे हैं।
टैंकर ब्लास्ट में 20 ने गंवाई थी जान
20 दिसंबर को जयपुर-अजमेर हाईवे पर एलपीजी टैंकर में ब्लास्ट हो गया था। इससे एलपीजी गैस भांकरोटा में करीब 500 मीटर एरिया तक फैल गई। 40 से ज्यादा गाड़ियां इसकी चपेट में आ गई थी। हादसा इतना भयंकर था कि 27 लोग गंभीर रूप से झुलस गए, जिनमें से 20 की अब तक मौत हो चुकी है।