Rajasthan: प्रदेश की भजनलाल सरकार में मंत्रियों की हैसियत को लेकर ही सवाल खड़े हो रहे हैं। हैरानी है कि बजट की तैयारियों के नाम पर महकमें से जुड़ी बैठक मुख्यमंत्री भजलाल के स्तर पर ली जा रही हैं, उनमें उन महकमों के मंत्री को ही नहीं बुलाया जा रहा। वित्त विभाग ने पिछले बार कर्मचारियों के साथ प्री-बजट मीटिंग में वित्त मंत्री का नाम गायब कर दिया। इस बार 19 जून को प्रस्तावित कर सलाहकर, व्यापार संघों की प्री बजट मीटिंग में उद्योग राज्यमंत्री को ही नहीं बुलाया गया।
प्रदेश की अफसरशाही के आगे सरकार के मंत्री भी बौने नजर आने लगे हैं। अफसर चाहें तो मंत्री को मीटिंग में बुलाएं और न चाहें तो न बुलाएं। जी हां बजट पूर्व संवाद को लेकर 19 जून को दोपहर साढ़े तीन बजे मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में बुलाई गई बैठक के आदेश को देखकर तो यही लगता है । यह बैठक सीएमओ स्थित कन्वेशन हॉल में होने जा रही है। बैठक में डिप्टी सीएम दिया कुमारी, उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री कर्नल राज्यवर्धन सिंह राठौड़ को बुलाया गया है । लेकिन उद्योग एवं वाणिज्य राज्यमंत्री केके विश्नोई को आमंत्रित नहीं किया गया है ।
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यह बैठक व्यापार, कर सलाहकार और उद्योग क्षेत्र के प्रतिनिधियों क साथ होने जा रही है। बैठक में अधिकारियों के अलावा 29 संगठनों को बजट पूर्व चर्चा के लिए आमंत्रित किया गया है। बता दें कि इससे पहले भी वित्त विभाग ने कुछ दिनों पहले कर्मचारी संगठनों की प्री बजट बैठक वित्तमंत्री दीया कुमारी को नजरंदाज किया था। कांग्रेस ने भी इस इसे मुद्दा बनाया। जब मामला मीडिया में उछला तो आनन-फानन में संशोधित आदेश जारी कर दिए। लेकिन इनती बड़ी चूक बार-बार करने वाले अफसरों पर कोई कार्रवाई नहीं होना सरकार पर गंभीर सवाल खड़े करता है।