सीकर जिले के खाटू श्यामजी में पुजारी सेवक महासंघ का द्वितीय महाधिवेशन भव्य रूप से संपन्न हुआ। दो दिन चले इस अधिवेशन में प्रदेशभर से लगभग आठ हजार पुजारियों ने भागीदारी निभाई। सम्मेलन का मुख्य एजेंडा पुजारियों के अधिकारों की रक्षा, मंदिरों के संसाधनों का संरक्षण और सनातन परंपरा को मजबूती देना रहा।
महाधिवेशन में महासंघ के संरक्षक महंत मोहन सिंह दास ने कहा कि पुजारियों को अब एकजुट होकर संगठित शक्ति का परिचय देना होगा। उन्होंने सरकार को 13 सूत्री मांगों का ज्ञापन सौंपने की घोषणा की। रैवासा धाम के पीठाधीश्वर स्वामी राजेंद्रदास देवाचार्य ने आरोप लगाया कि सरकार मंदिरों की आय का उपयोग अन्य धार्मिक स्थलों के विकास में कर रही है, जबकि सनातन मंदिरों की उपेक्षा हो रही है।
महाकाल मंदिर, उज्जैन के पुजारी और महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष महेश पुजारी ने कहा कि सनातन धर्म विश्व का सबसे प्राचीन धर्म है, मगर आज पुजारियों की स्थिति चिंताजनक हो गई है। उन्होंने कहा कि सरकारें चर्च और मस्जिदों में हस्तक्षेप नहीं करतीं, लेकिन मंदिरों पर नियंत्रण किया जा रहा है, जो अनुचित है।
महाधिवेशन में प्रमुख मांगों में सनातन बोर्ड का गठन, अराजकीय भूमिहीन मंदिरों के पुजारियों को 30 हजार रुपये प्रतिमाह मानदेय, प्रोटेक्शन बिल लागू करना, ग्रामीण मंदिरों के पट्टे पुजारियों को देना, मंदिरों को मुफ्त बिजली-पानी सुविधा, विशेष ट्रिब्यूनल की स्थापना, पुजारी कल्याण कोष का गठन, भोग राशि न्यूनतम 10 हजार तय करना और मंदिर माफी भूमि का गैर-कृषि उपयोग की अनुमति शामिल रही।
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कार्यक्रम में सभी जिलाध्यक्षों का सम्मान भी किया गया। महासंघ ने संकल्प लिया कि यदि सरकार इन मांगों को नजरअंदाज करती है, तो पुजारियों का समुदाय एकजुट होकर आंदोलन करेगा और आगामी चुनाव में सरकार व प्रतिनिधियों से सीधा जवाब मांगेगा।
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