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Jaipur: बैसाखी पर सिटी पैलेस में रखी गई 338 साल पुरानी गुरु गोविंद सिंह की तलवार, दर्शन के लिए जुटे श्रद्धालु

Fri, 14 Apr 2023 02:31 PM IST
अर्पित याज्ञनिक न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर

सार

बैसाखी का पर्व सिख समाज और पंजाबी परिवार के लोग श्रद्धा और उल्लास के साथ यह पर्व राजस्थान में भी मना रहे हैं। बैसाखी की पूर्व संध्या पर जयपुर के सिटी पैलेस में गुरु गोविंद सिंह जी की 338 साल पुरानी पवित्र ऐतिहासिक तलवार दर्शनों के लिए रखी गई।
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338 साल पुरानी गुरु गोविंद सिंह की तलवार - फोटो : Amar Ujala Digital
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विस्तार
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गुरु गोविंद सिंह की इस पवित्र ऐतिहासिक तलवार को हिमाचल प्रदेश में सिरमौर जिले के नाहान राज परिवार को भेंट किया गया था। इसके बाद यह तलवार जयपुर की पूर्व राजमाता पद्मिनी देवी अपने पीहर से जयपुर लेकर आईं, तभी से यह तलवार सिटी पैलेस में मौजूद है। इसे पवित्र और भाग्यशाली तलवार माना जाता है और इसकी पूजा की जाती है। सिटी पैलेस के सर्वतो भद्र चौक में हुए कार्यक्रम में गुरु गोविंद सिंह जी की तलवार दर्शनों के लिए रखी गई।

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दरअसल, गुरु गोबिंद सिंह ने कुछ समय नाहन (सिरमौर जिला) में व्यतीत किया था। तब नाहन छोड़ते समय उन्होंने अपनी निजी तलवार तत्कालीन शासक को स्मृति चिह्न के रूप में भेंट की थी। राजमाता पद्मिनी देवी, जो कि नाहन से हैं, कुछ वर्ष पहले तलवार को जयपुर लेकर आई थीं। तब से यह तलवार सिटी पैलेस में है। सोसायटी के सदस्यों ने कृपाण के दर्शन कराने के लिए राजमाता पद्मिनी देवी का आभार व्यक्त किया।

बैसाखी और खालसा साजना दिवस मनाया
सिटी पैलेस में बैसाखी-खालसा साजना दिवस मनाया गया। सिटी पैलेस के सर्वतोभद्र चौक में 'खालसा साजना दिवस' के उपलक्ष्य पर सुखमनी सेवा सोसायटी, बनी पार्क के सदस्यों ने बैसाखी की पूर्व संध्या पर शब्द कीर्तन और अरदास की। इस अवसर पर सिखों के 10वें गुरु, गुरु गोबिन्द सिंह जी की ऐतिहासिक 'कृपाण' तलवार को सोसायटी के सदस्यों के दर्शनों के लिए रखा। सुखमनी सेवा सोसायटी की प्रेसिडेंट पिंकी सिंह ने बताया कि कार्यक्रम में सदस्यों द्वारा, "मेरा बैद गुरु गोबिन्दा'', "नासरो मन्सूर गुरु गोबिन्द सिंह" और "वाह वाह गोबिंद सिंह आपे गुरु चेला" आदि शब्दों का गायन किया गया। वहीं सोसायटी के सेक्रेटरी सूर्य उदय सिंह ने गुरु गोबिन्द सिंह जी की 'कृपाण' के इतिहास के बारे में बताया और सभी के भले की अरदास की। इस अवसर पर एमएमएस द्वितीय संग्रहालय की एग्जीक्यूटिव ट्रस्टी, रमा दत्त, एमएमएस द्वितीय संग्रहालय की डायरेक्टर रीमा हूजा और ओएसडी रामू रामदेव भी मौजूद रहे।
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बैसाखी पर कीर्तन करते श्रद्धालु। - फोटो : Amar Ujala Digital
बैसाखी पर्व का धार्मिक महत्व
बैसाखी का धार्मिक महत्व यह है कि इस दिन सिक्खों के दसवें गुरु, गुरु गोबिन्द सिंह जी ने सन् 1699 में आनंदपुर साहिब में खालसा पंथ की स्थापना की थी। उन्होंने सर्वप्रथम पंज प्यारों (5 प्यारे अनुयायी) को अमृतपान करवा कर खालसा बनाया। उन पांच प्यारों के हाथों से स्वयं भी अमृतपान किया। गुरु गोबिन्द सिंह जी ने ही दो नारे दिए हैं - 'जो बोले सो निहाल, सत श्री अकाल' और 'वाहेगुरु जी का खालसा - वाहेगुरु जी की फतह'। ये नारे सिख धर्म की पहचान हैं। वैसाखी के तहत सोसायटी के पाठ ग्रुप 'आपणी मेहर कर' के सदस्यों ने गरु जी की बाणी चौपई साहिब के 7,700 पाठ किए। सभी गुरुद्वारों में बैसाखी पर्व बहुत धूमधाम से मनाया जा रहा है। बैसाखी पर्व सबको गुरु गोबिन्द सिंह जी के बताए मार्ग पर चलने को प्रेरित करता है।
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