घायलों से मुलाकात के दौरान पूर्व सीएम अशोक गहलोत के साथ नेता प्रतिपक्ष टीका राम जूली
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राजस्थान विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने जैसलमेर-जोधपुर हाईवे पर हुई भीषण बस दुर्घटना में मृतकों के परिजनों को दी जा रही अलग-अलग आर्थिक सहायता राशि को लेकर राज्य सरकार पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि जब सफर एक था, बस एक थी और हादसा भी एक ही था, तो मुआवजे में भेदभाव करना असंवेदनशील और अनुचित है।
मुख्यमंत्री की घोषणा पर उठे सवाल
टीकाराम जूली ने कहा कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने हादसे के दो दिन बाद मृतकों के परिजनों के लिए आर्थिक सहायता की घोषणा की, लेकिन इसमें मुआवजे की राशि अलग-अलग तय की गई, जो कि मानवीय दृष्टि से गलत है। जूली के अनुसार, सरकार द्वारा एक व्यक्ति की मौत पर 10 लाख रुपये, जबकि तीन या उससे अधिक मौतों पर 25 लाख रुपये देने का निर्णय न्यायसंगत नहीं कहा जा सकता। उन्होंने कहा कि यह राहत नीति ‘संवेदनशील शासन के बजाय सौदेबाजी की मानसिकता’ को दर्शाती है।
‘मानवीय संवेदना के विरुद्ध निर्णय’
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि यह निर्णय न केवल असंवेदनशील है, बल्कि इससे सरकार की प्राथमिकताओं पर भी प्रश्नचिह्न लगता है। उन्होंने कहा कि जब सफर एक, बस एक और हादसा एक था, तो आर्थिक मदद अलग-अलग क्यों? सरकार के ऐसे व्यवहार से पहले से ही शोकाकुल परिवारों की पीड़ा और बढ़ जाएगी। जूली ने यह भी कहा कि दीपावली जैसे त्योहारी समय में इस तरह की असमान राहत नीति से पीड़ित परिवारों के जख्म गहरे हुए हैं।
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समान मुआवजे की मांग
टीकाराम जूली ने राज्य सरकार से आग्रह किया कि सभी मृतकों के आश्रितों को समान आर्थिक सहायता राशि प्रदान की जाए, क्योंकि सभी यात्री एक ही बस में सवार थे और समान त्रासदी के शिकार हुए। उन्होंने कहा कि राहत राशि को लेकर भेदभाव करना सरकार की संवेदनशीलता और पारदर्शिता पर सवाल उठाता है।
‘भेदभाव सरकार की संवेदनशीलता पर प्रश्नचिह्न’
जूली ने कहा कि राहत राशि तय करने का यह तरीका मोलभाव जैसा प्रतीत होता है, जो शासन की नीति के विपरीत है। उन्होंने कहा कि सरकार को तुरंत समान मुआवजा देकर संवेदनशील प्रशासन का उदाहरण पेश करना चाहिए, ताकि भविष्य में किसी भी आपदा या दुर्घटना के समय राहत राशि में असमानता की गुंजाइश न रहे।
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