राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने बीड़ पापड़ में स्थित खसरा नंबर 7/2 की 2.9087 हेक्टेयर जमीन को वन भूमि मानते हुए 30 दिन के भीतर उसका कब्जा वन विभाग को सौंपने का आदेश दिया है। इस भूमि को राजस्थान राज्य औद्योगिक विकास और निवेश निगम (रीको) ने करीब 70 वर्ष पहले अपना बताते हुए उद्योगों को आवंटित किया था। अधिकरण के इस आदेश से विश्वकर्मा औद्योगिक क्षेत्र की करीब 50 औद्योगिक इकाइयों पर संकट गहरा गया है। इन इकाइयों में करोड़ों रुपये का निवेश और हजारों श्रमिकों का रोजगार जुड़ा हुआ है।
बेदखली के आदेश से मंडराया संकट
अधिकरण ने स्पष्ट किया है कि पूर्व स्वीकृति के बिना वन भूमि का गैर-वानिकी कार्यों में उपयोग नहीं किया जा सकता। सरकारी रिकॉर्ड में इस जमीन को रीको के नाम वैध रूप से हस्तांतरित किए जाने का कोई पर्याप्त आधार उपलब्ध नहीं है। अधिकरण ने प्रधान मुख्य वन संरक्षक को निर्देश दिए हैं कि वे उन अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करें और विभागीय जांच कराएं, जिनके कार्यकाल के दौरान यह आवंटन हुआ था। इसके साथ ही गृह विभाग को वन विभाग की सहायता के लिए आवश्यक प्रशासनिक और सुरक्षा बल उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया है। दूसरी ओर, रीको ने उद्यमियों से अधिकरण में अपना मामला स्वयं निपटाने को कहा है। इससे उद्यमी सड़क पर आने की आशंका को लेकर चिंतित हैं। उद्यमियों ने चेतावनी दी है कि यदि उन्हें रीको की गलती के कारण बेदखल किया गया तो वे आत्मदाह करने को विवश होंगे।
उद्यमियों की चिंता और पुनर्विचार की मांग
विश्वकर्मा इंडस्ट्रीज एसोसिएशन ने प्रभावित 50 उद्यमियों को राहत देने के लिए रीको से विधिक और प्रशासनिक कदम उठाने की अपील की है। एसोसिएशन के अध्यक्ष अरुण कुमार गुप्ता ने कहा कि स्थिति पूरी तरह स्पष्ट होने तक उद्यमियों के हितों को ध्यान में रखते हुए कार्रवाई रोकी जानी चाहिए। महासचिव पुष्पकुमार स्वामी ने बताया कि यदि उद्योगों को हटाया गया तो करोड़ों रुपये का निवेश बर्बाद होगा, श्रमिकों का रोजगार छिन जाएगा और बैंकों का करोड़ों रुपये का ऋण फंस जाएगा। पीड़ित उद्यमी जुगल अग्रवाल ने कहा कि उद्योगपतियों ने रीको की आवंटन प्रक्रिया और सरकारी दस्तावेजों पर विश्वास करके निवेश किया था। उन्होंने रीको से जिम्मेदारी लेते हुए वन विभाग को वैकल्पिक वन भूमि हस्तांतरित करने और रिकॉर्ड दुरुस्त कराने की मांग की। उन्होंने आग्रह किया कि जब तक स्थिति स्पष्ट न हो, तब तक बेदखली, सीलिंग या ध्वस्तीकरण जैसी कार्रवाई पर पुनर्विचार किया जाए। साथ ही राजस्व, वन और रीको के अभिलेखों का संयुक्त परीक्षण कराया जाए।
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सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देगा रीको
रीको के प्रबंध निदेशक सुरेश कुमार ओला ने बताया कि अधिकरण के निर्णय के तहत जमीन के चिह्नीकरण के लिए जयपुर जिलाधीश और वन विभाग से अनुरोध किया गया है। रीको ने कानूनी परामर्श के आधार पर अधिकरण के आदेश के खिलाफ उच्चतम न्यायालय में अपील करने तथा पुनर्विचार याचिका दायर करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
दौलतपुरा की नीलामी भी चर्चा में
इस बीच, रीको की एक अन्य नीलामी भी चर्चा में आई है। बस्सी के पास दौलतपुरा में पहाड़ी के हिस्से में होटल निर्माण के लिए सात भूखंडों की नीलामी के लिए निविदाएं आमंत्रित की गई थीं। इसके लिए 500 से अधिक आवेदन आए थे। हालांकि, राजस्थान की हिल्स नीति के उल्लंघन और सामाजिक कार्यकर्ताओं द्वारा अधिकरण में जाने की तैयारी के बाद रीको ने अंतिम तिथि से पहले ही यह नीलामी प्रक्रिया रद्द कर दी। यदि यह नीलामी हो जाती तो वहां के उद्यमी भी इसी तरह के संकट में फंस जाते।